धार/इंदौर: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार स्थित भोजशाला (Bhojshala) विवाद में हाईकोर्ट (High Court) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी यानी सरस्वती मंदिर (Saraswati Temple) माना है। इंदौर बेंच ने एएसआई (ASI- Archaeological Survey of India) की रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया, जबकि मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप मंदिर का है और यहां देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मौजूद था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विवादित संरचना पहले से मौजूद मंदिरों के अवशेषों से बनाई गई थी। फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि वह इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती देगा।
मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधियों और धार शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि फैसले की कानूनी समीक्षा की जाएगी और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर होगी। वहीं हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर मांग की है कि बिना उनकी बात सुने कोई आदेश जारी न किया जाए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इस मामले में एएसआई के 98 दिन लंबे सर्वे, ऐतिहासिक दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फैसले में यह भी कहा गया कि भोजशाला परिसर संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है। कोर्ट ने सरकार को इंग्लैंड से वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा वापस लाने के प्रयास करने का भी निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूरे धार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन हाई अलर्ट पर है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
भोजशाला विवाद लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच धार्मिक अधिकारों को लेकर चल रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी के दिन पूजा और जुमे की नमाज दोनों के लिए अलग-अलग समय तय करने का आदेश दिया था।