बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (high court) ने बुधवार को एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि बिना प्रवेश (penetration) के पुरुष द्वारा ejaculation (वीर्य स्खलन) को बलात्कार (rape) नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के तहत बलात्कार की परिभाषा में प्रवेश एक अनिवार्य तत्व है, और यदि यह साबित नहीं होता तो पूरा अपराध नहीं माना जा सकता।
यह मामला 2004 की एक घटना से जुड़ा था, जिसमें आरोपी पर लड़की को जबरन उसके घर से अपने घर ले जाने, कपड़े उतरवाने और उसके खिलाफ जबरदस्ती यौन कृत्य करने का आरोप था। निचली अदालत ने आरोपी को बलात्कार का दोषी ठहराकर सात साल की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने जांच के दौरान पाया कि पीड़िता के बयान में भिन्नता और मेडिकल साक्ष्यों में प्रवेश का प्रमाण नहीं मिला। इसलिए आरोपी का कृत्य बलात्कार का प्रयास (attempt to rape) माना गया और सजा को तीन वर्ष छह महीने में कम कर दिया गया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ejaculation होने से बलात्कार का पूरा अपराध सिद्ध नहीं होता। यह फैसला कानून में बलात्कार और बलात्कार के प्रयास के बीच अंतर को स्पष्ट करता है और सजा तय करने में प्रवेश को महत्वपूर्ण मानदंड मानता है।
