नक्सल इलाकों में विकास की रफ्तार तेज, दो साल में 41 सड़कें पूरी, अब सेटेलाइट से होगी निगरानी

By : hashtagu, Last Updated : January 30, 2026 | 6:00 am

रायपुर, छत्तीसगढ़। भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल में बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित (Naxal affected) इलाकों में विकास (Development) की तस्वीर तेजी से बदली है। जहां एक ओर नक्सली आतंक (Naxal violence) लगभग समाप्ति की ओर है, वहीं दूसरी ओर घने जंगलों में बसे ग्रामीणों के लिए सड़क, आवास और रोजगार के रास्ते खुल रहे हैं। नक्सल क्षेत्रों में सड़क निर्माण (Road construction) में तेजी आई है और अब उनके मेंटेनेंस (Maintenance) के लिए सेटेलाइट (Satellite) से निगरानी की जाएगी।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार को विभाग के दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने बताया कि अब तक 41 सड़कों का काम पूरा किया जा चुका है। दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण क्षेत्र में वर्ष 2006-07 से बननी शुरू हुई सड़क, जो नक्सली गतिविधियों के कारण 19 साल से अधूरी थी, अब पूरी कर ली गई है। इस सड़क के बनने से आधा दर्जन गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिला है और बच्चे अब आसानी से स्कूल पहुंच पा रहे हैं। सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क, जो पांच साल से अटकी थी, उसे भी पूरा किया गया है।

मंत्री शर्मा ने बताया कि सड़क अधूरी होने के कारण इन इलाकों के ग्रामीण सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे। सड़क बनने से अब बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं गांवों तक पहुंच रही हैं। सरकार का फोकस बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित जिलों में सड़क नेटवर्क मजबूत करने पर है।

सड़क निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को भी तेजी से लागू किया जा रहा है। सबको आवास देने के लक्ष्य और मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए पहली कैबिनेट बैठक में ही 18.12 लाख आवासों को मंजूरी दी गई। वर्ष 2011 और 2018 की सर्वे सूची के 26.95 लाख हितग्राहियों को केंद्र से स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें से करीब साढ़े सत्रह लाख मकान पूरे हो चुके हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 47 हजार अधूरे मकानों को भी मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, मुख्यधारा में लौटे 3400 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराया जाएगा।

ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत स्व-सहायता समूहों की संख्या बढ़कर 2.82 लाख हो गई है। पहले यह संख्या 2.74 लाख थी। रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ की शुरुआत की गई है। साढ़े बारह हजार महिलाओं को 141 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। प्रदेश में 10 लाख ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरगुजा में देश का पहला ग्रामीण गारबेज कैफे शुरू किया गया है, जबकि दंतेवाड़ा के छिंदनार में कबाड़ के उपयोग से गार्डन तैयार किया गया है। जी राम जी योजना के तहत अब 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जा रही है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत फेस-4 की शुरुआत कर दी गई है। इसके अंतर्गत गांव-गांव तक रोड कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी। इस चरण में करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से सड़कें बनाई जाएंगी। ऑनलाइन टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि शुक्रवार है। अगले महीने के अंत तक सभी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस फेस में करीब 774 सड़कों का चयन किया गया है। बस्तर में अभी 208 सड़कें अधूरी हैं, जिन्हें भी पूरा किया जाएगा।

विभागीय सर्वे के आधार पर अत्यंत जरूरी सड़कों को प्राथमिकता दी गई है। इस बार डामर सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग बढ़ाया जाएगा। प्लास्टिक मिश्रित सड़कें 6 से 7 साल तक टिकाऊ मानी जा रही हैं, जबकि सामान्य डामर सड़कें 4 से 5 साल तक ही सुरक्षित रहती हैं। स्वच्छ भारत मिशन की स्वच्छताग्रही दीदियों से प्राप्त वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा। अब तक तीन स्थानों पर इस तकनीक से सड़कें बनाई जा चुकी हैं और परिणाम सकारात्मक रहे हैं।