कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सल प्रभावित (naxal affected) क्षेत्रों में बदलाव (change) की नई तस्वीर सामने आ रही है, जहां आत्मसमर्पण (surrender) करने वाले नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को रोजगार (employment) उपलब्ध कराया जा रहा है।
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ऐसे लोगों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश तेज हुई है। प्रशासन द्वारा उन्हें नौकरी के साथ-साथ कौशल विकास प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
बस्तर संभाग के इस इलाके में बड़ी संख्या में नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में वापस आ रहे हैं। पिछले कुछ समय में सैकड़ों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाया है। प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में बड़ा संकेत है।
पुनर्वास नीति के तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक पैकेज, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही नक्सल हिंसा के पीड़ित परिवारों को भी रोजगार और शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनका जीवन दोबारा पटरी पर आ सके।
अधिकारियों का मानना है कि रोजगार और विकास के जरिए ही नक्सलवाद को कमजोर किया जा सकता है। यही कारण है कि सुरक्षा अभियान के साथ-साथ अब पुनर्वास और रोजगार योजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पुलिस और प्रशासन लगातार सक्रिय नक्सलियों से अपील कर रहे हैं कि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं। इस पहल से इलाके में भरोसा बढ़ा है और धीरे-धीरे हालात बदलते नजर आ रहे हैं।