रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान महतारी वंदन योजना (Mahtari Vandan Yojana) को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। योजना (Scheme) से 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटाए जाने और लाभार्थियों (Beneficiaries) की संख्या 70.09 लाख से घटकर 68.54 लाख होने के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि महिलाओं के नाम मृत्यु (Death), ई-केवाईसी (E-KYC) नहीं होने, आयकरदाता (Income Taxpayer) बनने और अपात्र पाए जाने जैसी वजहों से सूची से हटाए गए हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान राशन व्यवस्था का मुद्दा भी उठा। विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय राशन कार्डधारियों को 7 किलो अतिरिक्त चावल देने की मांग की। वहीं भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने राशन दुकानों में उपभोक्ताओं को कथित तौर पर जबरन मसाले बेचने का आरोप लगाया। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि शिकायत और संबंधित दस्तावेज मिलने पर पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सदन में सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित तौर पर नकली मंगलसूत्र बांटे जाने का मामला भी गूंजा। पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री और कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने सरकार से पूछा कि संबंधित एजेंसी के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बालोद जिले से नकली मंगलसूत्र की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कार्रवाई का सवाल नहीं उठता।
प्रश्नकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा जारी है।
कांग्रेस इस अविश्वास प्रस्ताव के जरिए नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों को सदन में रखकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे रही है।
विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 35 सदस्य हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक भी सदन में है। ऐसे में संख्या बल भाजपा के पक्ष में होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।