एक ही गांव से निकले दो माओवादी कमांडर, रास्ते अलग-अलग; एक ने किया आत्मसमर्पण, दूसरा मुठभेड़ में मारा गया

By : hashtagu, Last Updated : January 4, 2026 | 9:26 am

सुकमा, छत्तीसगढ़:  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले (Sukma district) के एक ही गांव से निकले दो माओवादी नेताओं की कहानी अब अलग-अलग अंजाम पर पहुंच गई है। दोनों ही माओवादी संगठन की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की बटालियन-1 में शीर्ष पदों तक पहुंचे, लेकिन एक ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जबकि दूसरा सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।

बारसा देवा उर्फ बारसा सुक्का और मदवी हिदमा एक ही गांव से थे और लंबे समय तक माओवादी संगठन में साथ काम करते रहे। दोनों सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे थे। संगठन के भीतर उनकी गिनती ताकतवर कमांडरों में होती थी।

मदवी हिदमा पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई बार आत्मसमर्पण करने की अपील की गई, लेकिन उन्होंने हथियार नहीं डाले। आखिरकार हाल ही में एक मुठभेड़ के दौरान उनकी मौत हो गई। दूसरी ओर, बारसा देवा ने हालात को भांपते हुए हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया और तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

पुलिस के अनुसार बारसा देवा पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह कई बड़े हमलों में शामिल रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि दबाव बढ़ने और संगठन के कमजोर होने के चलते उसने आत्मसमर्पण का विकल्प चुना। फिलहाल वह मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया में है और उस पर नजर रखी जा रही है।

सुरक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम माओवादी आंदोलन के कमजोर पड़ने का संकेत है। शीर्ष स्तर के नेताओं का या तो मारा जाना या आत्मसमर्पण करना इस बात की ओर इशारा करता है कि बस्तर और आसपास के इलाकों में माओवादी संगठन की पकड़ लगातार ढीली हो रही है।