भोपाल। भोपाल फैमिली कोर्ट (Bhopal Family Court) में एक ऐसा तलाक मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों, महत्वाकांक्षा और पहचान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक महिला पुलिस अधिकारी और उसके पुजारी पति से जुड़ा है। पति का आरोप है कि उसने अपनी पत्नी को पुलिस अफसर बनाने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा उसकी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में खर्च किया, लेकिन अफसर बनने के बाद वही पत्नी अब उसे बोझ मान रही है और तलाक चाहती है।
पति का कहना है कि शादी के समय पत्नी का सपना पुलिस सेवा में जाने का था। उसने पूरे मन से उसका साथ दिया। वह मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कर परिवार का खर्च चलाता था और उसी आय से पत्नी की कोचिंग, पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी करवाई। इस दौरान दोनों करीब तीन से चार साल तक साथ रहे। पत्नी ने परीक्षा पास की, ट्रेनिंग पूरी की और नौकरी जॉइन कर ली, लेकिन इसके बाद उनके रिश्तों में दूरी बढ़ने लगी।
पति के अनुसार, पत्नी ने उससे शिखा कटवाने, पहनावा बदलने और पुजारी जैसा दिखना छोड़ने को कहा। पति ने यह कहकर इनकार कर दिया कि उसका धर्म, उसका पहनावा और उसका पेशा उसकी पहचान है, जिसे वह नहीं छोड़ सकता। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया और आखिरकार पत्नी ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी।
महिला हाल ही में सब-इंस्पेक्टर बनी है। अदालत में दिए गए बयान में उसने कहा कि उसे पति के धोती-कुर्ता पहनने, सिर पर शिखा रखने और पुजारी होने से सामाजिक रूप से शर्मिंदगी महसूस होती है। इसी कारण वह अब उसके साथ नहीं रहना चाहती।
मामले में कई दौर की काउंसलिंग भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। फैमिली काउंसलर शैल अवस्थी के अनुसार, जब किसी रिश्ते में जीवनशैली और सामाजिक स्थिति में अचानक बड़ा अंतर आ जाता है, तो टकराव बढ़ना आम बात है। जब एक साथी तेजी से आगे बढ़ता है और दूसरा वहीं रह जाता है, तो स्वीकार्यता कम होने लगती है और यही दूरी धीरे-धीरे रिश्ते को तोड़ देती है। यह मामला कानून से ज्यादा इंसानी रिश्तों और बदलती सोच की कहानी बनकर सामने आया है।