भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच पानी संकट (Water Crisis) लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के 42 प्रतिशत शहरों में लोगों को रोज पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। कई शहरों में एक दिन छोड़कर तो कहीं 3 से 6 दिन में पानी सप्लाई हो रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को पानी के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ रही है और टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के कई जिलों में जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं। नगर निगम और नगर पालिकाओं ने पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सप्लाई कम कर दी है। सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम शहरों में देखा जा रहा है, जहां गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट और गंभीर हो गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घटा है। लगातार बढ़ते तापमान और कम बारिश के कारण स्थिति खराब हुई है। कई इलाकों में हैंडपंप और बोरवेल भी जवाब देने लगे हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परेशानी बढ़ गई है।
इंदौर, ग्वालियर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई शहरों में पानी की सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। कई जगहों पर लोग सुबह से पानी भरने के लिए लाइन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जल संकट को लेकर प्रशासन ने लोगों से पानी बचाने की अपील की है। नगर निकायों को टैंकरों की संख्या बढ़ाने और वैकल्पिक जल व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ शहरों में निजी टैंकरों के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर मानसून नहीं पहुंचा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं राज्य सरकार का दावा है कि जल संकट से निपटने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और जरूरत वाले इलाकों में अतिरिक्त पानी सप्लाई भेजी जा रही है।