गर्भवती पत्नी ट्रैफिक में फंसी, गवर्नर के काफिले के खिलाफ सड़क पर बैठा शख्स, बेंगलुरु का VIDEO वायरल

वीडियो में देखा जा सकता है कि शख्स सड़क के बीचोंबीच पालथी मारकर बैठा है और ट्रैफिक पुलिस उससे हटने की अपील कर रही है। इस दौरान उसकी पुलिसकर्मियों से तीखी बहस भी हुई।

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 11:55 AM IST

बेंगलुरु: कर्नाटक (Karnataka) की राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) में वीआईपी कल्चर (VIP Culture) को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत (Governor Thaawarchand Gehlot) के काफिले (Convoy) के गुजरने के लिए ओल्ड एयरपोर्ट रोड (Old Airport Road) पर ट्रैफिक रोक दिया गया, जिसके कारण एक व्यक्ति अपनी गर्भवती पत्नी (Pregnant Wife) के साथ लंबे समय तक जाम में फंस गया। पत्नी की हालत बिगड़ती देख नाराज शख्स बीच सड़क पर धरने (Protest) पर बैठ गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल (Viral Video) हो रहा है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि शख्स सड़क के बीचोंबीच पालथी मारकर बैठा है और ट्रैफिक पुलिस उससे हटने की अपील कर रही है। इस दौरान उसकी पुलिसकर्मियों से तीखी बहस भी हुई। शख्स बार-बार कहता नजर आया कि उसकी पत्नी गर्भवती है और काफी देर से कार में परेशान हो रही है। उसने सवाल उठाया कि अगर राज्यपाल वीआईपी हैं तो क्या आम नागरिकों का समय और जरूरतें कोई मायने नहीं रखतीं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक राज्यपाल के काफिले के गुजरने तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इसी दौरान व्यक्ति का धैर्य जवाब दे गया और उसने गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने के लिए सड़क पर बैठने का फैसला किया। वीडियो में ट्रैफिक पुलिस उसे हटाने की कोशिश करती दिख रही है, लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहता है। बाद में पुलिस ने उसे वहां से हटाया और यातायात सामान्य कराया।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब देशभर में वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों को होने वाली परेशानियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल के महीनों में मुंबई और दूसरे शहरों से भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां वीआईपी काफिलों या राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण लोगों को लंबे ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कई लोगों ने व्यक्ति के विरोध का समर्थन किया है। यूजर्स का कहना है कि आपात स्थिति में फंसे लोगों के लिए सड़कें पूरी तरह बंद करना आम नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ है। वहीं कुछ लोगों ने सुरक्षा कारणों से वीआईपी मूवमेंट को जरूरी भी बताया। घटना के बाद बेंगलुरु में एक बार फिर वीआईपी कल्चर और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर बहस तेज हो गई है।