श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का PSLV-C62 मिशन निर्धारित कक्षा में उपग्रह स्थापित करने में सफल नहीं हो सका। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से हुए इस प्रक्षेपण में रॉकेट के पहले और दूसरे चरण सामान्य रहे, लेकिन तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी आने से मिशन लक्ष्य से भटक गया। इसके चलते रॉकेट अपने पेलोड्स को तय कक्षा में स्थापित नहीं कर पाया।
ISRO ने बताया कि तीसरे चरण के दौरान असामान्य व्यवहार देखा गया, जिससे उड़ान पथ प्रभावित हुआ। मिशन में कुल 16 पेलोड शामिल थे, जिनमें मुख्य रूप से DRDO का पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 (अन्वेषा) और कई भारतीय व अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप के उपग्रह शामिल थे। सभी पेलोड्स को सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाना था, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण यह संभव नहीं हो सका।
हालांकि इस असफलता के बीच एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। स्पेन की स्टार्टअप कंपनी ऑर्बिटल पैराडाइम का रि-एंट्री कैप्सूल मिशन के दौरान सिग्नल भेजने में सफल रहा। ISRO और संबंधित एजेंसियां इस कैप्सूल से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर रही हैं, जिसे भविष्य के अभियानों के लिए अहम माना जा रहा है।
ISRO के अनुसार, मिशन से जुड़े टेलीमेट्री और अन्य तकनीकी आंकड़ों की गहन जांच की जा रही है, ताकि तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि विश्लेषण पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी और आगे के मिशनों में जरूरी सुधार किए जाएंगे।