AAP में बड़ा टकराव: राघव चड्ढा का हमला, बोले- तीनों आरोप झूठे और साजिश

पार्टी की ओर से राघव चड्ढा पर संसद में उनके व्यवहार, विपक्षी मुद्दों पर उनकी भूमिका और एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को लेकर उनकी स्थिति पर सवाल उठाए गए थे।

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  • Publish Date - April 4, 2026 / 07:30 PM IST

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party – AAP) में बड़ा राजनीतिक विवाद (political controversy) सामने आया है। राज्यसभा सांसद (Rajya Sabha MP) राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने पार्टी नेतृत्व द्वारा लगाए गए तीनों आरोपों (three allegations) को पूरी तरह झूठ (false) और साजिश (conspiracy) करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने और उन्हें कमजोर करने के लिए यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया है।

पार्टी की ओर से राघव चड्ढा पर संसद में उनके व्यवहार, विपक्षी मुद्दों पर उनकी भूमिका और एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को लेकर उनकी स्थिति पर सवाल उठाए गए थे। इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए चड्ढा ने साफ कहा कि वह कभी भी संसद से वॉकआउट (walkout) नहीं हुए और न ही किसी अहम प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सच्चाई संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड में साफ देखी जा सकती है।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया। इसके बाद पार्टी और उनके बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। इस फैसले ने पार्टी के अंदर चल रहे तनाव को सार्वजनिक कर दिया।

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया के जरिए भी अपनी बात रखी और कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी कि वह सभी तथ्यों को सार्वजनिक करें ताकि सच्चाई सामने आ सके।

उन्होंने तीखे अंदाज में कहा, “घायल हूं इसलिए घातक हूं”, जिससे संकेत मिलता है कि वह इस विवाद में पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे।

वहीं, पार्टी के कुछ नेताओं ने उन पर “सॉफ्ट PR” करने और गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के आरोप लगाए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत कई नेताओं ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, जिससे पार्टी के अंदर मतभेद और गहरा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद लंबे समय से चल रहे थे, लेकिन अब यह विवाद खुलकर सामने आ गया है। पहले भी उनकी अनुपस्थिति और कम सक्रियता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

यह पूरा घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के अंदरूनी संघर्ष को उजागर करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है और पार्टी की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है।