ट्रंप की H-1B वीज़ा नीति से अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ माहौल गर्म, अमेरिकी कंपनियों पर बढ़ा दबाव

विशेषज्ञों का कहना है कि नई नीति और कामगारों के प्रति बढ़ती नकारात्मक रुझान का सीधा संबंध H-1B वीज़ा प्रणाली में बदलाव और विदेशी कुशल श्रमिकों की संख्या पर नियंत्रण से है।

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 10:22 AM IST

वॉशिंगटन डीसी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा H-1B वर्क वीज़ा सिस्टम में बड़े बदलाव के बाद अमेरिका में भारतीय पेशेवरों और भारतीय मूल के कर्मचारियों के खिलाफ माहौल तेजी से बदला है। नई वीज़ा नीति के लागू होते ही कई अमेरिकी कंपनियों को सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा प्रणाली में सुधार करते हुए लॉटरी सिस्टम को खत्म कर दिया है और अब वीज़ा चयन को उच्च वेतन पाने वाले आवेदकों से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही H-1B वीज़ा आवेदन शुल्क को भी काफी बढ़ा दिया गया है, जिससे यह वीज़ा दुनिया के सबसे महंगे वर्क वीज़ा में शामिल हो गया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी पेशेवरों पर पड़ा है, जो H-1B वीज़ा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या में होते हैं।

नीति में बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर कई अमेरिकी कंपनियों जैसे फेडएक्स, वॉलमार्ट और वेरिज़ोन को निशाना बनाया जा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये कंपनियां भारतीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देकर अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर कम कर रही हैं। कई पोस्ट में भारतीय पेशेवरों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है और कंपनियों पर “नौकरियां बेचने” जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

हालांकि संबंधित कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वे पूरी तरह से अमेरिकी कानूनों का पालन करती हैं और भर्ती केवल योग्यता, अनुभव और जरूरत के आधार पर की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि H-1B वीज़ा नीति में बदलाव और चुनावी राजनीति के कारण अमेरिका में प्रवासियों, खासकर भारतीय समुदाय के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है।

मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की बयानबाजी और ऑनलाइन नफरत से भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ हिंसा और भेदभाव का खतरा बढ़ सकता है।