छत्तीसगढ़ में परीक्षा गड़बड़ी पर कड़ा कानून पास, 3-10 साल जेल और 1 करोड़ जुर्माना; अब एक प्लेटफॉर्म से होंगी सरकारी भर्तियां

By : hashtagu, Last Updated : March 20, 2026 | 3:56 pm

SSB bill 2026: विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी (malpractice) रोकने और भर्ती प्रक्रिया (recruitment process) को पारदर्शी (transparent) बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया। सदन में परीक्षा गड़बड़ी रोकथाम बिल और स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड (SSB – Staff Selection Board) बिल 2026 पास कर दिए गए। नए कानून के तहत परीक्षाओं में नकल या गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

बिल के मुताबिक, यदि कोई अभ्यर्थी नकल करते पकड़ा जाता है तो उसका रिजल्ट रोक दिया जाएगा और उसे 1 से 3 साल तक परीक्षा देने से बैन किया जाएगा। हालांकि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं होगा और निर्धारित अवधि के बाद वह फिर से परीक्षा में शामिल हो सकेगा।

इसके अलावा, संगठित गड़बड़ी या अन्य गंभीर अपराधों में शामिल दोषियों के लिए 3 से 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। वहीं पेपर लीक, अवैध प्रवेश और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसे मामलों में 1 से 5 साल की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाओं और एजेंसियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई संस्था दोषी पाई जाती है तो उस पर 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही उसे कम से कम 3 साल तक परीक्षा कराने से बैन किया जाएगा और परीक्षा से जुड़े खर्च की भी वसूली की जाएगी।

सरकार ने स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड बिल 2026 के जरिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सभी सरकारी भर्तियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने का फैसला किया है। इससे अलग-अलग विभागों की अलग भर्ती प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। व्यापम को भी इस नए बोर्ड में विलय किया जाएगा।

सरकार का दावा है कि इस कदम से भर्ती प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनेगी। साथ ही परीक्षाओं में ईमानदारी और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, जिससे अभ्यर्थियों की मेहनत का सही मूल्यांकन हो सकेगा और उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछली सरकार के समय भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों के कारण कई युवाओं के साथ अन्याय हुआ। वहीं नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी बिल का समर्थन करते हुए कहा कि नकल और संगठित गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त कानून जरूरी है, लेकिन सरकार को अब बेहतर काम पर ध्यान देना चाहिए।

सत्र के दौरान प्रश्नकाल में विपक्ष ने अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों का मुद्दा भी उठाया। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि प्रदेश में 665 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से 19 में ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है और उनकी नियमित निगरानी की जाती है।

इसके अलावा छातिम वृक्ष को लेकर भी सवाल पूछा गया, जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसके रोपण पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और न ही इसे हटाने की कोई योजना फिलहाल है।

अंत में विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।