दावड़ा विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक जागरूकता कार्यशाला: डॉ. दिनेश मिश्र बोले- अंधविश्वास खत्म करने के लिए वैज्ञानिक सोच जरूरी

By : hashtagu, Last Updated : April 13, 2026 | 9:14 pm

रायपुर: दावड़ा विश्वविद्यालय में अंधश्रद्धा के खिलाफ वैज्ञानिक जागरूकता (Scientific Awareness) विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष Dinesh Mishra ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।

डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि समाज से अंधविश्वास और कुरीतियों को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Approach) अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विज्ञान, तर्क और विश्लेषण के आधार पर सोच विकसित करनी चाहिए ताकि वे सही निर्णय ले सकें।

उन्होंने बताया कि शिक्षा और तकनीक में प्रगति के बावजूद अंधविश्वास आज भी समाज में मौजूद है, जिसके कारण कई निर्दोष लोग प्रताड़ना का शिकार होते हैं। इसलिए वैज्ञानिक सोच का प्रसार बेहद जरूरी है।

डॉ. मिश्र ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण तर्कशीलता से जुड़ा है और यह व्यक्ति में खोज की प्रवृत्ति बढ़ाता है। उन्होंने इसे संविधान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि किसी भी बात को तभी सही माना जाना चाहिए जब वह प्रयोग और परिणाम से सिद्ध हो सके।

उन्होंने आगे कहा कि जादू-टोना, टोनही, बलि और बाल विवाह जैसी कुरीतियां आज भी समाज में मौजूद हैं, जो लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं। बीमारियों के इलाज के लिए केवल चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि झाड़-फूंक या टोटकों से इलाज संभव नहीं है।

डॉ. दिनेश मिश्र ने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि वैक्सीन और चिकित्सा विज्ञान की मदद से ही दुनिया ने इस संकट से मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को भूत-प्रेत जैसी बातों से डराने के बजाय उनमें आत्मविश्वास और वैज्ञानिक सोच विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कई जगहों पर टोनही के संदेह में महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है, जो पूरी तरह अमानवीय और गलत है। भूत-प्रेत या चमत्कार जैसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और ऐसे मामलों में अक्सर धोखाधड़ी या मानसिक कारण शामिल होते हैं।

कार्यक्रम में उन्होंने समाज से अपील की कि अंधविश्वास और कुरीतियों को खत्म करने में सभी को मिलकर योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में प्रो. मनीष वर्मा ने आभार व्यक्त किया और डॉ. सुनील कश्यप ने कार्यक्रम का संयोजन किया।