बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी की जगह केक काटें, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की अपील से छिड़ी बहस
By : hashtagu, Last Updated : May 25, 2026 | 6:46 pm
रायपुर: बकरीद (Bakrid) पर जानवरों की कुर्बानी (Animal Sacrifice) के बजाय केक काटकर त्योहार मनाने की अपील के बाद छत्तीसगढ़ में नई बहस शुरू हो गई है। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने लोगों से अपील की है कि ईदुज्जुहा (Eid ul Adha) को इको फ्रेंडली (Eco Friendly) और अहिंसक तरीके से मनाया जाए।
डॉ. मिश्र ने कहा कि जीवित जानवरों की कुर्बानी देने के बजाय लोग प्रतीकात्मक रूप से केक काटकर भी धार्मिक रस्म निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में ऊंट और कुछ अन्य जानवरों की कुर्बानी पर रोक लगाने वाले नियम पहले से लागू हैं और कानून तोड़ने पर कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना समेत कई राज्यों में इस संबंध में आदेश और अदालतों के फैसले भी सामने आ चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई जगहों पर लोगों ने जागरूकता के चलते बकरीद अलग तरीके से मनाई है। कुछ लोगों ने जानवरों की कुर्बानी छोड़कर केक काटा, जबकि कुछ जगहों पर बकरे की तस्वीर वाले केक का इस्तेमाल कर प्रतीकात्मक रूप से त्योहार मनाया गया।
डॉ. दिनेश मिश्र के मुताबिक, देश में पशुबलि को लेकर कई कानून मौजूद हैं, लेकिन उनका पूरी तरह पालन नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि हर धर्म प्रेम, दया और अहिंसा का संदेश देता है। ऐसे में किसी भी निर्दोष जीव की जान लेना सही नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि कुर्बानी का वास्तविक अर्थ त्याग और बलिदान की भावना है। इसलिए लोग जरूरतमंदों की मदद कर सकते हैं। गरीबों को कपड़े देना, दवाइयों में मदद करना, बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना या आर्थिक सहायता देना भी उसी भावना को दर्शाता है।
डॉ. मिश्र ने महात्मा बुद्ध और भगवान महावीर के अहिंसा के संदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे कामों से बचना चाहिए जिससे किसी जीव को पीड़ा पहुंचे। उनकी इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।




