ट्रंप का बड़ा बयान: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ‘हमेशा के लिए खोलने’ का दावा, ईरान-तेल संकट पर दुनिया में हलचल बढ़ी

By : hashtagu, Last Updated : April 15, 2026 | 6:59 pm

वॉशिंगटन, अमेरिका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को चीन और पूरी दुनिया के लिए “हमेशा के लिए खोल रहे हैं”। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह कदम केवल किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा (global energy security) के लिए लिया जा रहा है और ऐसी स्थिति दोबारा कभी नहीं आने दी जाएगी।

ट्रंप ने आगे कहा कि वह ईरान को हथियार नहीं भेजेंगे और भविष्य में जब वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे तो दोनों के बीच सकारात्मक और दोस्ताना माहौल रहेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और चीन मिलकर “समझदारी से और बेहतर तरीके” से काम कर रहे हैं, हालांकि साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई (military action) करने में भी सक्षम है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब पहले ट्रंप प्रशासन की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) जैसी स्थिति के संकेत दिए गए थे। इस कदम को लेकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई थी क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे चली वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी। इसके बाद अमेरिकी पक्ष ने ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने या वहां से आने वाले जहाजों को रोकने की बात कही थी। साथ ही उन “न्यूट्रल” देशों के जहाजों पर भी कार्रवाई की चर्चा हुई थी जो ईरान को सुरक्षित मार्ग के लिए भुगतान कर रहे थे। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल आय (oil revenue) को सीमित करना बताया गया।

इससे पहले 7 अप्रैल को दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम जैसी स्थिति बनी थी, जिसके बाद ईरान ने कुछ समय के लिए सीमित ट्रांजिट की अनुमति दी थी, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में थोड़ी नरमी आई थी। लेकिन 12 अप्रैल को बातचीत टूटने के बाद स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई और तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, खासकर कच्चे तेल (crude oil) की आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है।