छत्तीसगढ़ पावर प्लांट ब्लास्ट: अनिल अग्रवाल समेत कई पर FIR, 20 मजदूरों की मौत के बाद बड़ा खुलासा

By : hashtagu, Last Updated : April 17, 2026 | 10:45 am

रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए भीषण पावर प्लांट हादसे (power plant accident) में 20 मजदूरों की मौत के बाद पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (First Information Report) दर्ज की है। यह मामला 14 अप्रैल को सिंघितराई गांव स्थित थर्मल पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट (boiler blast) से जुड़ा है, जिसने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया।

पुलिस जांच में शुरुआती तौर पर सामने आया है कि प्लांट के संचालन और मेंटेनेंस में गंभीर लापरवाही (negligence) बरती गई थी। बताया जा रहा है कि बॉयलर में अत्यधिक दबाव बनने के बावजूद समय पर सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, जिसके कारण अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। इस धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनी गई और प्लांट का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

एफआईआर में अनिल अग्रवाल के अलावा प्लांट हेड, सीनियर इंजीनियरों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इन सभी पर लापरवाही से मौत का कारण बनने, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने और मशीनों के गलत संचालन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और अगर आगे और लोगों की जिम्मेदारी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

जांच रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले हैं कि हादसे के समय बॉयलर सिस्टम पर अचानक लोड बढ़ाया गया था, जिससे स्टीम पाइप (steam pipe) में प्रेशर बहुत ज्यादा हो गया। यह दबाव सिस्टम सहन नहीं कर पाया और पाइप फटने के बाद जोरदार विस्फोट हो गया। तकनीकी खामियों और सुरक्षा जांच में कमी को भी इस हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।

इस दुर्घटना में 20 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है, जहां कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद प्लांट को तुरंत बंद कर दिया गया और पूरे इलाके को सील कर दिया गया है ताकि जांच में किसी तरह की बाधा न आए।

राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रियल जांच (magisterial inquiry) के आदेश दिए हैं और अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। साथ ही मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा भी की गई है।

यह हादसा छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक माना जा रहा है। इसने एक बार फिर उद्योगों में सुरक्षा मानकों और नियमों के पालन को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों में भी इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।