छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की बड़ी पहल, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित
By : hashtagu, Last Updated : June 25, 2026 | 11:38 pm
रायपुर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में साय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने यूसीसी (UCC) के अध्ययन, सुझाव और प्रारूप (Draft) तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee) का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार 25 जून को इसका आदेश जारी किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है।
जारी आदेश के अनुसार समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत और मोहन पवार को सदस्य बनाया गया है, जबकि ज्योति रानी सिंह महिला सदस्य के रूप में शामिल होंगी। यह पांच सदस्यीय समिति राज्य में यूसीसी लागू करने की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करेगी और सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
समिति का मुख्य कार्य विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों की समीक्षा करना होगा। इसके साथ ही विभिन्न समुदायों और वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुझाव तैयार किए जाएंगे ताकि एक समान नागरिक कानून का प्रभावी प्रारूप तैयार किया जा सके।
राज्य सरकार ने समिति को नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेने की जिम्मेदारी भी दी है। इसके अलावा समिति उन राज्यों की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी जहां समान नागरिक संहिता लागू है या जहां इस दिशा में पहल की गई है। प्राप्त सुझावों और अध्ययन के आधार पर समिति यूसीसी का विस्तृत मसौदा तैयार करेगी।
समिति अपनी रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपेगी। इसके साथ ही यूसीसी लागू करने के लिए आवश्यक विधायी और प्रशासनिक अनुशंसाएं भी देगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सरकार व्यापक अध्ययन और सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों के सुझावों को महत्व दिया जाएगा ताकि संतुलित और प्रभावी व्यवस्था तैयार की जा सके।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पहल को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सकता है जो समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। इससे पहले देश में यूसीसी को लेकर लगातार बहस होती रही है और कई राज्यों ने इस विषय पर अध्ययन या पहल की है।
यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू होगा, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से संबंध रखते हों। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लोग विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में अपने-अपने धार्मिक या पर्सनल लॉ का पालन करते हैं।
सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता लागू होने पर नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। राज्य सरकार के अनुसार इसका प्रमुख उद्देश्य विभिन्न पर्सनल लॉ में मौजूद असमानताओं को दूर करना और महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को कम करने और उन्हें पुरुषों के बराबर कानूनी अधिकार दिलाने में मदद मिलेगी।
हालांकि यूसीसी को लेकर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों की अलग-अलग राय रही है। ऐसे में समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट और सुझाव आने वाले समय में इस विषय पर राज्य सरकार की आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।




