पीएम मोदी का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र को कुचलने वाला काला दौर था

By : hashtagu, Last Updated : June 25, 2026 | 2:06 pm

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने 25 जून 1975 को लागू की गई इमरजेंसी (Emergency) को भारतीय लोकतंत्र (Democracy) के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। इमरजेंसी की 51वीं वर्षगांठ पर आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ (Samvidhan Hatya Diwas) के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वह दौर था जब भारतीय लोकतंत्र को बेरहमी से कुचल दिया गया था और संविधान की मूल भावना पर सीधा हमला किया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि इमरजेंसी संविधान पर सीधा आक्रमण थी। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया, अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया तथा लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि यह दिन उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। प्रधानमंत्री के अनुसार उस कठिन समय में हजारों नागरिकों ने चुप रहने के बजाय लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी।

मोदी ने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ देशवासियों को उस अंधकारमय दौर की याद दिलाता है जब लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों पर गंभीर प्रहार हुआ था। उन्होंने कहा कि यह दिवस लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर देश में इमरजेंसी लागू की गई थी, जो 21 मार्च 1977 तक प्रभावी रही। इस दौरान प्रेस सेंसरशिप, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और कई संवैधानिक अधिकारों पर रोक जैसी घटनाएं सामने आई थीं।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 से 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इस दिन को मनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को इमरजेंसी के दौर और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व से अवगत कराना है।

इमरजेंसी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा इसे लोकतंत्र पर हमला बताकर कांग्रेस को घेर रही है, जबकि कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार की नीतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाती रही है।