कर्नाटक के बाद छत्तीसगढ़ में फिर गरमाया ‘ढाई-ढाई साल फॉर्मूला’, भूपेश बोले- हाईकमान ने कभी इस्तीफा नहीं मांगा

रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के पहले दिन से ही उनसे यह सवाल पूछा जाता था कि क्या वे केवल ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बने हैं।

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 04:36 PM IST

रायपुर: कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) के इस्तीफे के ऐलान के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पुरानी सियासत और ‘ढाई-ढाई साल फॉर्मूला’ (Two and Half Year Formula) एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने साफ कहा कि कांग्रेस हाईकमान (High Command) ने उनसे कभी इस्तीफा नहीं मांगा और उन्होंने पांच साल तक पार्टी द्वारा दी गई जिम्मेदारी निभाई।

रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के पहले दिन से ही उनसे यह सवाल पूछा जाता था कि क्या वे केवल ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उसी दिन कह दिया था कि अगर हाईकमान का फोन आएगा तो वे उसी वक्त इस्तीफा दे देंगे। लेकिन पूरे पांच साल में पार्टी की ओर से ऐसा कोई निर्देश नहीं मिला।

भूपेश बघेल ने कहा कि विपक्ष लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश करता रहा, लेकिन उन्होंने पार्टी के फैसले और जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से पालन किया। उनके बयान के बाद एक बार फिर कांग्रेस के अंदर 2018 विधानसभा चुनाव के बाद चले सत्ता संघर्ष और नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

भूपेश बघेल के बयान पर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव (TS Singhdeo) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीति में कई बातें बंद कमरे में होती हैं और उनकी मर्यादा बनाए रखना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि किस नेता को कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी, इसका फैसला पार्टी हाईकमान ही करता है।

वहीं, छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी (OP Choudhary) ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष खुलकर देखा है। उन्होंने कहा कि सभी ने देखा कि सत्ता के लिए कांग्रेस नेताओं के बीच किस तरह खींचतान चलती रही और जनता ने उसका जवाब चुनाव में दे दिया। इसी कारण कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के पुराने राजनीतिक समीकरण, सत्ता संघर्ष और ‘ढाई-ढाई साल फॉर्मूले’ को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि 2018 से 2023 तक कांग्रेस सरकार के दौरान अंदरूनी विवाद किस हद तक असर डालते रहे।