रायपुर: रायपुर में चल रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Vidhan sabha) के बजट सत्र के दौरान सदन में कई अहम मुद्दों को लेकर जोरदार बहस और राजनीतिक हलचल देखने को मिली। प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान विपक्षी विधायकों ने अलग अलग जनहित के मामलों को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। वहीं राज्यपाल द्वारा लौटाए गए एक महत्वपूर्ण विधेयक की जानकारी भी सदन में रखी गई, जिस पर सदन का ध्यान केंद्रित रहा।
सत्र के दौरान विपक्ष ने बीजापुर जिले के गंगालूर क्षेत्र में स्थित पोटा केबिन से जुड़ा मामला उठाया। जानकारी के अनुसार वहां पढ़ने वाली तीन नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने की घटना को लेकर विपक्ष ने इसे गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक मामला बताते हुए सदन में चर्चा की मांग की। विपक्षी नेताओं ने कहा कि आदिवासी इलाकों में संचालित छात्रावासों और पोटा केबिन की व्यवस्था पर इस घटना से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए विस्तृत चर्चा कराने की मांग की, लेकिन मंत्री के जवाब के बाद आसंदी ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद नाराज विपक्षी विधायकों ने सदन में हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय इसे दबाने की कोशिश कर रही है।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राज्यपाल द्वारा लौटाए गए छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक से जुड़ी जानकारी भी सदन में प्रस्तुत की गई। इस मुद्दे पर भी राजनीतिक हलचल बनी रही और इसे लेकर आगे चर्चा की संभावना जताई गई।
सत्र के दौरान अमानक बरदाने यानी कम वजन वाले धान के बोरे का मुद्दा भी उठा। विधायकों ने बताया कि कई जिलों में किसानों को कम वजन वाले बोरे मिलने से नुकसान हुआ है। इस पर मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में बड़ी संख्या में बोरे अमानक पाए गए हैं और इस मामले में संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इसके अलावा खाद्य वितरण व्यवस्था, महिला और बाल विकास से जुड़ी योजनाएं, ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर भी सरकार से सवाल किए गए। विधानसभा में पक्ष और विपक्ष के बीच इन मुद्दों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली और पूरा सत्र राजनीतिक रूप से गर्म रहा।