छत्तीसगढ़ में 5 लाख भूमिहीन मजदूरों को 500 करोड़, दीनदयाल योजना से बढ़ेगी सालाना आय
By : hashtagu, Last Updated : March 24, 2026 | 7:56 pm
रायपुर: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Vishnu deo Sai) 25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार (Balodabazar) से दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत लगभग 5 लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के खातों में करीब 500 करोड़ रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर (direct transfer) करेंगे।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की आय में वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के संकल्प बजट में इस योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
इस योजना के तहत 4.95 लाख से अधिक पात्र परिवारों के लिए 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है।
योजना का लाभ केवल कृषि मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य भूमिहीन परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया है। इसमें वनोपज संग्राहक, चरवाहे, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी जैसे पारंपरिक सेवा प्रदाता और अनुसूचित क्षेत्रों के पुजारी, बैगा, गुनिया और मांझी परिवार शामिल हैं। विशेष रूप से 22,028 बैगा और गुनिया परिवारों को भी इस योजना में जोड़ा गया है।
पहले इस योजना के तहत 7,000 रुपये प्रति वर्ष दिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। इससे परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे शिक्षा, स्वास्थ्य तथा दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे।
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार रायपुर में सबसे ज्यादा 53,338 लाभार्थी हैं, बिलासपुर में 39,401 और महासमुंद में 37,011 लाभार्थी शामिल हैं। वहीं बीजापुर में सबसे कम 1,542, कोरिया में 1,549 और नारायणपुर में 1,805 लाभार्थी हैं। सभी लाभार्थियों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, जिससे समयबद्ध और पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि भूमिहीन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। यह पहल राज्य सरकार के उस संकल्प को दर्शाती है, जिसमें हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य देना प्राथमिकता है।



