साय कैबिनेट के बड़े फैसले: पाइपलाइन से घर-घर गैस, IPS अधिकारियों का डिमोशन रद्द

By : hashtagu, Last Updated : April 30, 2026 | 6:32 am

रायपुर (छत्तीसगढ़)- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Chief Minister Vishnu Deo Sai) की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल (cabinet meeting) की बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए। शहरी ऊर्जा व्यवस्था (urban energy system) को मजबूत करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति-2026’ (gas distribution policy 2026) को मंजूरी दी गई है, जिससे अब शहरों में पाइपलाइन (pipeline) के जरिए सस्ती और स्वच्छ प्राकृतिक गैस (natural gas) उपलब्ध कराई जाएगी।

इस नई नीति के लागू होने के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों में घर-घर पाइपलाइन गैस पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। इससे लोगों को एलपीजी के मुकाबले सस्ता और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा, साथ ही ईंधन की उपलब्धता भी आसान होगी।

कैबिनेट में 1988 बैच के तीन आईपीएस अधिकारियों संजय पिल्ले, आरके विज और मुकेश गुप्ता के पक्ष में बड़ा फैसला लेते हुए उनका डिमोशन रद्द कर दिया गया है। सरकार ने करीब 5 साल पुराने उस फैसले को पलट दिया है, जिसके तहत इन अधिकारियों को पदावनत किया गया था।

इसके अलावा राजनांदगांव जिला क्रिकेट एसोसिएशन को 5 एकड़ जमीन देने का भी निर्णय लिया गया है। यह जमीन सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा के नाम दर्ज भूमि में से रियायती दर पर आवंटित की जाएगी।

वहीं मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के तहत 11 करोड़ 98 लाख रुपए की सहायता राशि को भी मंजूरी दी गई है। इससे जरूरतमंद लोगों के इलाज और अन्य जरूरी मदद के लिए राहत मिलेगी।

गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए दो सरकारी और दो निजी कंपनियों को जिम्मेदारी दी गई है। इस योजना के तहत रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, महासमुंद, बस्तर और सरगुजा संभाग के अधिकांश जिलों को कवर किया जाएगा। कंपनियां पहले ही करोड़ों रुपए का निवेश कर बाहरी नेटवर्क तैयार कर चुकी हैं, लेकिन नीति के अभाव में शहरों के अंदर पाइपलाइन विस्तार में दिक्कत आ रही थी, जो अब दूर हो जाएगी।

आईपीएस अधिकारियों के मामले में, साल 2018 में संजय पिल्ले, आरके विज और मुकेश गुप्ता को डीजीपी बनाया गया था। लेकिन 2019 में केंद्र से अनुमति न मिलने या अन्य कारणों के चलते इन पदों को समाप्त कर दिया गया और तीनों अधिकारियों को डिमोट कर दिया गया। बाद में 2020 में विज और पिल्ले को फिर से प्रमोशन मिला, जबकि मुकेश गुप्ता को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

कांग्रेस सरकार के दौरान 2019 में मुकेश गुप्ता को निलंबित कर दिया गया था। उन पर नान घोटाले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और नेताओं व अफसरों के फोन टैप करने के आरोप लगे थे। उनकी निलंबन अवधि को भी बढ़ाया गया था।