रायपुर: भारत सरकार (Government of India) के नक्सलवाद (Naxalism) खत्म होने के दावे पर सियासत तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से देश को नक्सल मुक्त घोषित (declared Naxal-free) किए जाने और छत्तीसगढ़ में भी माओवादियों के समाप्त होने की बात के बाद कांग्रेस (Congress) ने इस दावे पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर सरकार से 10 अहम सवाल पूछे हैं।
कांग्रेस ने पूछा है कि क्या राज्य सरकार आधिकारिक तौर पर यह घोषणा करती है कि प्रदेश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है और अब कोई भी इलाका नक्सल प्रभावित नहीं है। साथ ही पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार इस बात की गारंटी लेगी कि अब प्रदेश में नक्सल हिंसा पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और आगे कोई घटना नहीं होगी।
पार्टी ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि नक्सलवाद खत्म करने के लिए क्या पैमाने तय किए गए थे और उनमें से कितने पूरे हो चुके हैं। कांग्रेस ने बस्तर को लेकर भी चिंता जताई और पूछा कि क्या अब वहां निर्दोष लोगों का खून नहीं बहेगा और आम आदिवासी सुरक्षित रहेगा।
कांग्रेस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने पूछा कि अगर नक्सलवाद समाप्त हो गया है तो बस्तर से अब तक कितने सुरक्षा बलों के कैंप हटाए गए हैं और कितनी बटालियनों की वापसी शुरू की गई है। इसके साथ ही यह भी सवाल किया गया कि क्या अब नागरिक बस्तर में कहीं भी बिना डर के आ-जा सकेंगे और सरकार उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेगी।
पार्टी ने कथित एनकाउंटर को लेकर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब नक्सलवाद के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या नहीं होगी। साथ ही यह भी पूछा गया कि नक्सल खतरे के आधार पर जिन लोगों को सुरक्षा दी गई थी, क्या उसकी समीक्षा की जाएगी।
कांग्रेस ने आदिवासियों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया और पूछा कि क्या अब बस्तर में जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का पूरा अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा और वे बिना किसी डर के अपने वनोपज एकत्र कर सकेंगे।
अंत में पार्टी ने झीरम घाटी जैसे राजनीतिक हत्याकांड का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या इसके आरोपियों को सजा मिलेगी या सरकार ने उन्हें भी माफ कर दिया है।