जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध राज्य सरकार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई।

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  • Updated On - February 20, 2026 / 08:55 PM IST

रायपुर, छत्तीसगढ़ 20 फरवरी 2026 : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने कहा है कि राज्य सरकार जल संरक्षण (Water Conservation) को जनआंदोलन (Mass Movement) का स्वरूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या (daily routine) का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं (water structures) की रक्षा करने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच (responsible approach) अपनाने का आह्वान किया।

नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिलों के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में जल संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकास की बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी को प्रसाद के समान मानकर उसके प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर राज्य सरकार जल संरक्षण को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया और कई जिलों को अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार भी मिले। पहले चरण में सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाएं बनाई गईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इनमें से 5 ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दूसरे चरण “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” के तहत तकनीक आधारित और अधिक परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा है। उन्होंने इसे जल सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन और औद्योगिक समूहों का सहयोग लिया जा रहा है। डबरी निर्माण से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी और किसानों को सिंचाई व मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत और क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2024 में सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है।

केंद्रीय मंत्री ने सभी कलेक्टरों से मनरेगा के तहत प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक महिला सरपंच द्वारा जल संचयन के लिए किए गए प्रयासों की भी सराहना की और व्यापक जनभागीदारी पर जोर दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, जल शक्ति मंत्रालय के सचिव कांताराव तथा प्रदेश के सभी कलेक्टर वर्चुअली उपस्थित रहे।