राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में गूंजा जनजातीय गौरव, CM विष्णुदेव साय बोले- आदिवासी समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय समाज केवल भारत की सांस्कृतिक आत्मा ही नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित विकास का सबसे बड़ा मार्गदर्शक भी है

  • Written By:
  • Publish Date - May 25, 2026 / 01:02 AM IST

नई दिल्ली: लाल किला मैदान में आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से पहुंचे जनजातीय समुदायों ने अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और विरासत की शानदार झलक पेश की। कार्यक्रम में जनजातीय गौरव, प्रकृति संरक्षण (Nature Conservation) और सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) का मजबूत संदेश गूंजा। अलग-अलग राज्यों के कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को जनजातीय एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बना दिया।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय समाज केवल भारत की सांस्कृतिक आत्मा ही नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित विकास का सबसे बड़ा मार्गदर्शक भी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ जीवन जीता आया है और आज पूरी दुनिया सतत विकास के जिस मॉडल की बात कर रही है, वह जनजातीय जीवनशैली में पहले से मौजूद है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय भाषाओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करना समय की बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है ताकि भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हो सके।

कार्यक्रम में पूर्वोत्तर राज्यों, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत प्रस्तुत किए। रंग-बिरंगी वेशभूषा, पारंपरिक वाद्ययंत्र और लोक कलाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समागम में वक्ताओं ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण ताकत है। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लिया।