महादेव सट्टा केस में ED का बड़ा एक्शन, 21.45 करोड़ की संपत्ति जब्त, दुबई तक फैला नेटवर्क बेनकाब

ED के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में करीब 98.55 लाख रुपए की चल संपत्ति और भारत व दुबई में स्थित कुल 27 अचल संपत्तियां शामिल हैं।

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  • Updated On - January 13, 2026 / 11:54 PM IST

रायपुर। महादेव ऑनलाइन बुक (Mahadev Online) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई की है। ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत कुल 21.45 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। इस कार्रवाई में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत 8 आरोपियों की भारत और दुबई में स्थित चल-अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं।

ED के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में करीब 98.55 लाख रुपए की चल संपत्ति और भारत व दुबई में स्थित कुल 27 अचल संपत्तियां शामिल हैं। इनमें आवासीय मकान, व्यावसायिक दुकानें, कृषि भूमि और लग्जरी अपार्टमेंट शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के भिलाई और दुर्ग के अलावा राजस्थान, जयपुर, नई दिल्ली और रायपुर की संपत्तियों पर भी कार्रवाई हुई है।

ED ने बताया कि महादेव ऑनलाइन बुक के मुख्य प्रमोटर और फरार आरोपी रवि उप्पल की दुबई में स्थित लगभग 6.75 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया गया है। वहीं, सौरभ चंद्राकर के करीबी सहयोगी रजत कुमार सिंह की भिलाई और दुबई की संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। रजत कुमार सिंह पर 15 से 20 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय का आरोप है।

इसके अलावा सौरभ आहूजा और विशाल रमानी की दुर्ग और भिलाई में स्थित संपत्तियों को भी अटैच किया गया है। दोनों पर करीब 100 पैनल संचालित कर लगभग 30 करोड़ रुपए की अवैध कमाई करने का आरोप है। जयपुर और नई दिल्ली में विनय कुमार और हनी सिंह की आवासीय संपत्तियों के साथ महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर समेत कई वाहन भी जब्त किए गए हैं। दोनों पर करीब 7 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का आरोप है।

राजस्थान में लकी गोयल की दुकानें और प्लॉट भी ED की कार्रवाई के दायरे में आए हैं। उस पर टेलीग्राम आधारित प्रचार के जरिए करीब 2.55 करोड़ रुपए की अवैध कमाई करने का आरोप है। वहीं, दुबई में बैठे ऑपरेटर राजा गुप्ता की रायपुर स्थित एक अचल संपत्ति को भी अटैच किया गया है।

ED के मुताबिक, यह जांच छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट था, जो टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 और लेजर 247 जैसे डोमेन के जरिए अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी चला रहा था। यह नेटवर्क फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करता था, जिसमें स्थानीय ऑपरेटर पैनल और ब्रांच संभालते थे, जबकि मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से पूरे नेटवर्क का संचालन करते थे। जांच में यह भी सामने आया कि कुल मुनाफे का 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटरों तक पहुंचता था।