6 करोड़ का इनामी, 135 जवानों का हत्यारा नक्सली देवजी ने किया सरेंडर, लाल आतंक को बड़ा झटका

By : hashtagu, Last Updated : February 22, 2026 | 2:02 pm

हैदराबाद/करीमनगर (तेलंगाना)। देश में लाल आतंक (Left Wing Extremism) के खात्मे की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। 6 करोड़ रुपये के इनामी और 135 जवानों की हत्या के आरोपी कुख्यात माओवादी नेता देवजी ने तेलंगाना में सरेंडर (Surrender) कर दिया है। देवजी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) यानी सीपीआई (माओवादी) का महासचिव (General Secretary) भी रह चुका है और संगठन की सेंट्रल मिलिट्री कमांड (Central Military Command) का प्रमुख भी था।

करीब 62 वर्षीय देवजी का असली नाम तिप्पिरी तिरुपति उर्फ संजीव पल्लव बताया जाता है। वह तेलंगाना के करीमनगर जिले के कोरुटला इलाके का रहने वाला है और एक दलित परिवार में जन्मा था। पिछले साढ़े तीन दशकों से वह नक्सल आंदोलन से जुड़ा हुआ था और उसे गुरिल्ला वॉर (Guerrilla War) का एक्सपर्ट माना जाता था।

मई महीने में छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में Nambala Keshava Rao उर्फ बसवराजू मारे गए थे। इसके बाद संगठन की कमान देवजी को सौंपी गई थी। बसवराजू के एनकाउंटर के बाद सीपीआई (माओवादी) का सर्वोच्च महासचिव पद खाली हो गया था, जिसे देवजी ने संभाला।

देवजी को देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 6 करोड़ रुपये का इनामी घोषित किया गया था। उस पर कई बड़े हमलों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने का आरोप है। छत्तीसगढ़ के रानी बोदली हमले में 55 जवानों और दंतेवाड़ा में 80 सीआरपीएफ जवानों की शहादत उसके नेतृत्व में हुए हमलों से जुड़ी बताई जाती है। वह जंगलों में घात लगाकर सुरक्षाबलों पर हमला करने की रणनीति में माहिर था।

देवजी के साथ ही माओवादी संगठन के एक अन्य वरिष्ठ नेता मल्ला राजिरेड्डी ने भी तेलंगाना में हथियार डाल दिए हैं। इसे नक्सल संगठन के शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

बसवराजू के एनकाउंटर के बाद देवजी की पोती इतलू सुमा तिप्पिरी ने एक भावुक वीडियो जारी कर अपने दादा से घर लौट आने की अपील की थी। उसने कहा था कि ‘ऑपरेशन कगार’ लगातार जानें ले रहा है और मौजूदा हालात में वह अपने दादा की सुरक्षित वापसी चाहती है। देवजी की पोती तेलंगाना के एक कॉलेज में पढ़ती है। बताया जाता है कि देवजी उसके जन्म से पहले ही अंडरग्राउंड हो गया था और दोनों की कभी मुलाकात नहीं हुई।

देवजी के सरेंडर को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। सरकार पहले ही 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य तय कर चुकी है। ऐसे में संगठन के शीर्ष नेताओं का आत्मसमर्पण लाल आतंक के कमजोर पड़ने का संकेत माना जा रहा है।