रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बहुचर्चित सेक्स CD (sex CD) मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) को बड़ा कानूनी झटका (legal setback) लगा है। रायपुर की विशेष CBI कोर्ट (Special CBI Court) ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें वर्ष 2024 में भूपेश बघेल को इस मामले से डिस्चार्ज (discharge) कर दिया गया था। अब इस फैसले के बाद बघेल समेत सभी आरोपियों को दोबारा ट्रायल (trial) का सामना करना पड़ेगा।
CBI ने सत्र अदालत में रिव्यू याचिका (review petition) दाखिल कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। सत्र अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार हैं। इसके बाद कोर्ट ने डिस्चार्ज आदेश को निरस्त कर दिया और मामले में फिर से सुनवाई के निर्देश दिए।
इस केस में CBI की ओर से मुख्य और पूरक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। आरोपियों में भूपेश बघेल के अलावा पत्रकार विनोद वर्मा (Vinod Verma), कारोबारी कैलाश मुरारका (Kailash Murarka), विजय भाटिया (Vijay Bhatia) और विजय पांडेय (Vijay Pandey) के नाम शामिल हैं।
यह मामला वर्ष 2017 का है, जब रायपुर के पंडरी और सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई थीं। आरोप है कि एक कथित अश्लील वीडियो (obscene video) यानी सेक्स CD के जरिए तत्कालीन भाजपा मंत्री राजेश मूणत (Rajesh Munat) की छवि खराब करने और ब्लैकमेल (blackmail) करने की कोशिश की गई थी। बाद में राज्य सरकार की सिफारिश पर मामले की जांच CBI को सौंप दी गई थी।
भूपेश बघेल और अन्य आरोपियों ने शुरू से ही आरोपों को गलत बताया है। बघेल का कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश (political conspiracy) के तहत दर्ज किया गया है। उन्होंने साफ किया है कि वे सत्र अदालत के इस फैसले को उच्च न्यायालय (High Court) में चुनौती देंगे।
