नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला (liquor scam) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को अंतरिम जमानत (interim bail) दे दी है। लखमा इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की कार्रवाई के बाद जेल में बंद थे। हालांकि जमानत के लिए बेल बॉन्ड (bail bond) की शर्तें निचली अदालत तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान कवासी लखमा छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे। अदालत ने कहा कि वे केवल कोर्ट में पेशी के लिए ही राज्य में प्रवेश कर सकते हैं और सुनवाई से एक दिन पहले छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। स्वास्थ्य कारणों को छोड़कर उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट नहीं दी जाएगी।
अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि कवासी लखमा विदेश यात्रा नहीं करेंगे और अपना पासपोर्ट (passport) विशेष न्यायाधीश की अदालत में जमा करेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना मोबाइल नंबर ED अधिकारियों को देना होगा और ट्रायल कोर्ट को सूचित किए बिना वह अपना फोन नंबर नहीं बदल सकेंगे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच में काफी समय लगने की संभावना है और जल्दबाजी में ट्रायल चलाने से अभियोजन (prosecution) के केस पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए जांच एजेंसियों को जांच पूरी करने के लिए पूरी छूट दी जानी चाहिए। कवासी लखमा की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि लखमा एक आदिवासी नेता हैं और छह बार विधायक रह चुके हैं।
इस मामले में कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को ED ने और 2 अप्रैल 2025 को EOW ने गिरफ्तार किया था। अब तक इस केस में कई चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और जांच पूरी हो चुकी है। मामले में कुल 52 आरोपी बनाए गए हैं और 1193 गवाह तय किए गए हैं। इनमें से 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें 19 को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
आरोप है कि शराब घोटाले में कथित रूप से घूस ली गई, जिसका इस्तेमाल घर या पार्टी कार्यालय के निर्माण जैसे कार्यों में किया गया। हालांकि बचाव पक्ष का कहना है कि पूरा मामला सह-आरोपियों के कथित कबूलनामों और भारतीय दंड संहिता की धारा 161 के बयानों पर आधारित है, जो घरेलू स्टाफ जैसे कुक आदि के बयान हैं। वकील ने यह भी कहा कि घूस लेने के आरोप हैं, लेकिन किसी तरह की कोई बरामदगी नहीं हुई है। 67 वर्षीय कवासी लखमा की उम्र और स्वास्थ्य को भी जमानत का आधार बताया गया।
वहीं राज्य सरकार और ED ने लखमा की अंतरिम जमानत का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की जांच के दौरान मंत्रियों, राजनीतिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आई है और इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।