मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
By : hashtagu, Last Updated : May 28, 2026 | 7:24 pm
भोपाल, मध्य प्रदेश: मशहूर उर्दू शायर (Urdu Poet) और पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र (Bashir Badr) का गुरुवार को भोपाल में निधन हो गया। 91 वर्षीय बशीर बद्र लंबे समय से डिमेंशिया (Dementia) और अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्होंने भोपाल स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही साहित्य जगत और शायरी प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार के अनुसार बशीर बद्र ने गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे अंतिम सांस ली। वह पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और उनकी याददाश्त भी काफी कमजोर हो गई थी। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। बताया गया है कि उनका अंतिम संस्कार शाम को किया जाएगा।
15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र ने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने वहीं उर्दू पढ़ाई और फिर मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग में लेक्चरर के रूप में लंबे समय तक सेवाएं दीं।
बशीर बद्र को आधुनिक उर्दू गजल का बड़ा नाम माना जाता था। उन्होंने कठिन उर्दू शब्दों की जगह आसान और आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी शायरी सीधे लोगों के दिलों तक पहुंची। उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं। “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए” उनका सबसे चर्चित शेर माना जाता है।
उनकी जिंदगी संघर्षों से भी भरी रही। पिता के निधन के बाद उन्होंने कुछ समय पुलिस विभाग में नौकरी की, लेकिन शायरी के प्रति लगाव ने उन्हें साहित्य की दुनिया में पहचान दिलाई। 1974 से 1990 तक का दौर उनके करियर का स्वर्णिम समय माना जाता है। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश में 500 से ज्यादा मुशायरों में हिस्सा लिया और अपनी गजलों से लोगों का दिल जीता।
साल 2021 में बशीर बद्र को 46 साल बाद उनकी पीएचडी की डिग्री मिली थी। जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने डिग्री उनके भोपाल स्थित घर भेजी, तो वह उसे देखकर भावुक हो गए थे और डिग्री को सीने से लगा लिया था। यह पल उनके जीवन के सबसे भावुक पलों में से एक माना गया।
साहित्य और कला के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सहित कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया था। उनके निधन पर गीतकार जावेद अख्तर समेत कई साहित्यकारों और कलाकारों ने शोक जताया है। जावेद अख्तर ने कहा कि बशीर बद्र के जाने से उर्दू भाषा और साहित्य को बड़ी क्षति हुई है।




