8 फरवरी को बोत्सवाना से MP आएंगे 8 चीते, CM मोहन यादव की केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से अहम बैठक
By : hashtagu, Last Updated : February 4, 2026 | 8:05 pm
By : hashtagu, Last Updated : February 4, 2026 | 8:05 pm
नई दिल्ली / भोपाल, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation), नए वन क्षेत्रों का विस्तार (Forest Expansion) और पर्यटन विकास (Tourism Development) से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि 28 फरवरी के आसपास बोत्सवाना (Botswana) से 8 नए चीते (Cheetahs) मध्य प्रदेश लाए जाएंगे। इन चीतों के पुनर्स्थापन (Rehabilitation) और सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफल बसाहट के बाद राज्य में वन्यजीव संरक्षण को और मजबूती मिली है और इससे जैव विविधता का दायरा बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में लगातार बड़े और ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार का फोकस पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने पर है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हों।
आज नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @byadavbjp जी के साथ प्रदेश में पर्यटन विकास, रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
असम से जंगली भैंसा लाने की प्रक्रिया तथा इस वर्ष 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीतों के आगमन को… pic.twitter.com/y3Su5GgunX
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 4, 2026
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि असम से जंगली भैंसा (Wild Buffalo) को मध्य प्रदेश लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस संबंध में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के बीच तंत्रगत प्रक्रियाओं (Institutional Process) पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे राज्य की जैव विविधता और अधिक समृद्ध होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक के बाद कहा कि मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को एक नई दिशा दी जा रही है, जिसमें रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार, वन्य प्राणियों के सुरक्षित पुनर्वास और इको-टूरिज्म को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।