भोपाल, मध्य प्रदेश: नीति आयोग ने मध्य प्रदेश को ‘परफॉर्मर स्टेट’ का दर्जा दिया है, लेकिन राज्य के ऊपर कर्ज (debt) का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और यह 5 लाख करोड़ रुपए के पार पहुँच गया है। मार्च महीने में ही सरकार ने तीन बार उधार लेकर कुल 16,200 करोड़ रुपए की नई उधारी ली, जिसे आर्थिक विशेषज्ञ उधारी की “हैट्रिक” (loan hattrick) बता रहे हैं।
मार्च में 3 तारीख को 6,300 करोड़, 10 तारीख को 5,800 करोड़ और फिर 4,100 करोड़ रुपए के दो अलग-अलग ऋण लेकर कुल 16,200 करोड़ रुपए का कर्ज राज्य ने बढ़ाया। इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश का कुल बकाया कर्ज अब लगभग 5.08 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
राजस्व में उछाल और टैक्स में बढ़ोतरी के बावजूद कर्ज बढ़ना चिंताजनक है। 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य के कुल राजस्व में 58.5% और टैक्स कलेक्शन में 62.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, फिर भी हर दिन औसतन 125 करोड़ रुपए का कर्ज लेना वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़ा करता है।
राज्य के कुल राजस्व खर्च का करीब 43% हिस्सा पेंशन और ब्याज जैसे तय खर्चों में जाता है। इसके अलावा ‘लाड़ली बहना’ जैसे कल्याणकारी योजनाओं पर भी भारी खर्च हो रहा है, जिसकी वजह से खजाने पर दबाव बढ़ रहा है।
सरकार का कहना है कि यह उधारी सड़कों, सिंचाई, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए आवश्यक है, जिससे राज्य का दीर्घकालिक विकास संभव हो। वहीं, विपक्ष सरकार पर वित्तीय अनुशासनहीनता का आरोप लगा रहा है और कह रहा है कि कर्ज का बोझ बढ़ना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।