महाकाल मंदिर में VIP दर्शन पर बवाल, VHP-बजरंग दल के धरने के बाद समिति ने जारी किया रिकॉर्ड, 29 लाख के नुकसान का दावा

By : hashtagu, Last Updated : June 24, 2026 | 2:20 pm

उज्जैन (मध्य प्रदेश): विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी (VIP) दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल (Bajrang Dal) के कार्यकर्ताओं ने मंदिर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था और लाइव दर्शन (Live Darshan) सुविधा में देरी के विरोध में प्रदर्शन करते हुए शंख द्वार पर धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद मंदिर समिति ने दोनों संगठनों से जुड़ा रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिया, जिसमें दावा किया गया है कि पिछले छह महीनों में इन संगठनों की सिफारिश पर 11,568 लोगों को प्रोटोकॉल के तहत निशुल्क दर्शन कराए गए, जिससे मंदिर को करीब 29 लाख रुपये की आय का नुकसान हुआ।

मंगलवार को बड़ी संख्या में विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता महाकाल मंदिर पहुंचे और मंदिर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मंदिर में बढ़ते वीआईपी कल्चर के कारण आम श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है। उनका कहना था कि मंदिर समिति ने दो महीने के भीतर लाइव दर्शन व्यवस्था फिर से शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

विहिप के जिला मंत्री जसवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि यह आंदोलन महाकाल मंदिर में बढ़ती वीआईपी संस्कृति और अव्यवस्थाओं के खिलाफ पहली चेतावनी है। उन्होंने कहा कि जब तक वीआईपी दर्शन व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं की जाती, तब तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाल ही में मंदिर के एक सुरक्षाकर्मी द्वारा श्रद्धालु के साथ कथित मारपीट की घटना का भी मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि मंदिर में आम भक्तों के साथ उचित व्यवहार नहीं हो रहा है और भस्म आरती तथा सामान्य दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विवाद के बीच मंदिर समिति के अधिकारियों ने भी अपनी तरफ से आंकड़े जारी किए। अधिकारियों के अनुसार जनवरी 2026 से अब तक विहिप और बजरंग दल की अनुशंसा पर 11,568 लोगों को प्रोटोकॉल के तहत निशुल्क दर्शन कराए गए। इसके अलावा 2,068 लोगों को भस्म आरती में भी शामिल कराया गया। समिति का दावा है कि इन व्यवस्थाओं के कारण मंदिर को लगभग 29 लाख रुपये की संभावित आय का नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने सवाल उठाया कि जो संगठन स्वयं प्रोटोकॉल व्यवस्था का लाभ लेते रहे हैं, वे अब उसी व्यवस्था का विरोध कैसे कर सकते हैं।

महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन को लेकर विवाद पहले भी अदालत तक पहुंच चुका है। इसी वर्ष जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने वीआईपी दर्शन व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा था कि मंदिर में किसे प्रवेश दिया जाए और किसे नहीं, यह निर्णय संबंधित प्राधिकरण का विषय है।

फिलहाल महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ हिंदू संगठन इसे समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर मंदिर प्रशासन अपने रिकॉर्ड और आंकड़ों के आधार पर इन आरोपों का जवाब दे रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक एवं धार्मिक चर्चा का विषय बन सकता है।