फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर, 40 लोगों की डूबने से मौत; 44 डिग्री के पार पहुंचा तापमान
By : hashtagu, Last Updated : June 24, 2026 | 12:28 am
पेरिस (फ्रांस): फ्रांस इस समय भीषण गर्मी (Heatwave), रिकॉर्ड तापमान (Record Temperature) और डूबने की घटनाओं (Drowning Incidents) से जूझ रहा है। देश में गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, झीलों और अन्य जलाशयों में उतरने वाले लोगों के बीच हादसों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले कुछ दिनों में 40 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की बताई जा रही है।
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने बताया कि 18 जून से अब तक 40 लोगों की जान डूबने की घटनाओं में जा चुकी है। अत्यधिक गर्मी के कारण लोग बिना निगरानी वाले जल क्षेत्रों में नहाने और तैरने पहुंच रहे हैं, जिससे हादसों में बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने लोगों से केवल सुरक्षित और निगरानी वाले स्थानों पर ही तैराकी करने की अपील की है।
फ्रांस के मौसम विभाग मेटियो-फ्रांस के अनुसार, देश ने अपने इतिहास का सबसे गर्म दिन दर्ज किया है। दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र पिसोस में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि बोर्डो सहित कई शहरों में 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया। देश के 54 से अधिक प्रशासनिक क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
गर्मी की वजह से पूरे फ्रांस में जनजीवन प्रभावित हुआ है। करीब 1,350 स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि कई इलाकों में रेल सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर भी असर पड़ा है। पेरिस के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में यह गर्मी “ओमेगा ब्लॉक” नामक मौसम प्रणाली के कारण बढ़ी है, जिसमें सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म हवाएं लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में फंसी रहती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसम घटनाएं पहले की तुलना में अधिक तीव्र और बार-बार देखने को मिल रही हैं।
फ्रांस के अलावा इटली, स्पेन, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और जर्मनी भी इस भीषण गर्मी की चपेट में हैं। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और स्वास्थ्य एजेंसियों ने बुजुर्गों, बच्चों तथा बीमार लोगों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है।
सरकार ने अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान में कमी नहीं आती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल पूरे यूरोप में यह हीटवेव लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।


