एमपी के मंडला में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप, ऑटो में महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म, सभी नवजातों की मौत

जानकारी के मुताबिक, मंडला जिले के नैगांव गांव की रहने वाली रजनी सिंगाराम को गर्भावस्था के सातवें महीने में प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सबसे पहले उन्हें घुठास सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

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  • Publish Date - July 8, 2026 / 04:36 PM IST

मंडला (मध्य प्रदेश)। प्रसव पीड़ा (Labour Pain) से तड़प रही एक गर्भवती महिला को समय पर एंबुलेंस (Ambulance) नहीं मिलने का आरोप सामने आया है। मजबूरी में परिजन उसे ऑटो (Auto Rickshaw) से अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही महिला ने चार समय से पहले जन्मे (Premature) बच्चों को जन्म दे दिया। चारों नवजातों (Newborns) की कुछ ही देर में मौत हो गई। इस घटना के बाद मंडला जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, मंडला जिले के नैगांव गांव की रहने वाली रजनी सिंगाराम को गर्भावस्था के सातवें महीने में प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सबसे पहले उन्हें घुठास सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूर होकर परिवार महिला को ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले जाने लगा।

रास्ते में ही महिला ने दो बेटियों और दो बेटों समेत चार बच्चों को जन्म दिया। सभी नवजात समय से पहले पैदा हुए थे और उनका वजन करीब 1.5-1.5 किलोग्राम था। अस्पताल पहुंचने तक चारों बच्चों की मौत हो चुकी थी। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की मौत समय से पहले जन्म और शरीर का पूरा विकास नहीं होने के कारण हुई। मां की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

महिला के पति गणेश सिंगाराम ने आरोप लगाया कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद उनके बच्चों की जान बच सकती थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नवजात बेहद कमजोर और समय से पहले जन्मे थे, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका।

मंडला के कलेक्टर राहुल नामदेव ढोटे ने कहा है कि फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। यदि शिकायत मिलती है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।