30 साल पुराने नर्मदा जल विवाद का अंत, मध्य प्रदेश सिर्फ 217 करोड़ देगा, 1500 करोड़ की बड़ी राहत

यह विवाद नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1979 के फैसले के बाद पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण, निर्माण और रखरखाव लागत के बंटवारे को लेकर चला आ रहा था।

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 02:43 PM IST

नई दिल्ली: करीब 30 साल से लंबित नर्मदा जल विवाद (Narmada Water Dispute) का आखिरकार समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच एक ऐतिहासिक समझौते (Agreement) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत मध्य प्रदेश अब गुजरात को 217 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान (One-time Payment) करेगा। इससे राज्य को करीब 1,500 करोड़ रुपये की संभावित देनदारी से बड़ी राहत मिली है।

यह विवाद नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1979 के फैसले के बाद पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण, निर्माण और रखरखाव लागत के बंटवारे को लेकर चला आ रहा था। चारों राज्यों के बीच कई दशकों से भुगतान और जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद बने हुए थे, जिसके कारण मामला लगातार लंबित था।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि समझौते के तहत गुजरात ने पुनर्वास और विस्थापन से जुड़े खर्च का 75 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करने पर सहमति जताई है। इसी वजह से मध्य प्रदेश की देनदारी लगभग 1,500 करोड़ रुपये से घटकर केवल 217 करोड़ रुपये रह गई। उन्होंने इसे राज्य के हित में लिया गया बड़ा फैसला बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि चारों राज्यों ने आपसी सहमति से दशकों पुराने वित्तीय विवाद का स्थायी समाधान निकाल लिया है। उन्होंने बताया कि यह एकमुश्त भुगतान का समझौता है, जिससे लंबे समय से लंबित सभी दावों का निपटारा हो जाएगा और भविष्य में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के साथ नर्मदा परियोजनाओं का संचालन आसान होगा।

यह समझौता सरदार सरोवर और नर्मदा परियोजनाओं से जुड़े लागत बंटवारे, पुनर्वास और भुगतान विवाद को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद खत्म हो गया है और नर्मदा परियोजनाओं के बेहतर संचालन का रास्ता साफ हो गया है।