जबलपुर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में ओबीसी (OBC – Other Backward Classes) आरक्षण (reservation) से जुड़े बहुचर्चित मामले एक बार फिर टल गए हैं। 27% आरक्षण को लेकर चल रही न्यायिक प्रक्रिया (judicial process) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाई, जिससे अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी।
जानकारी के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण से जुड़े चार महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई उस समय प्रभावित हुई जब राज्य सरकार समय पर जरूरी रिकॉर्ड मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश नहीं कर सकी। सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को इन मामलों से जुड़े दस्तावेज हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके कारण हाईकोर्ट के पास सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे और सुनवाई टालनी पड़ी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अब इन मामलों की अगली सुनवाई के लिए 13, 14 और 15 मई 2026 की तारीख तय की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी और 20 मार्च 2026 को आदेश जारी कर इन प्रकरणों को हाईकोर्ट में भेजते हुए विशेष बेंच गठित कर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने के निर्देश दिए थे।
इस बीच, मामले के टलने के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया में देरी कर रही है और महंगे वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि वह अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
सुनवाई को लेकर राज्य सरकार ने अपनी कानूनी रणनीति में भी बदलाव किया है। सरकार की ओर से नई अधिसूचना जारी कर बताया गया है कि अब विशेष अधिवक्ता ओबीसी वर्ग का पक्ष नहीं रखेंगे। इसके स्थान पर सरकार ने नए वकीलों को नियुक्त किया है, जो अदालत में राज्य का पक्ष प्रस्तुत करेंगे।
अब इस मामले पर सभी की नजरें मई में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।