एमपी में वोटर लिस्ट पर बड़ा विवाद: कांग्रेस प्रवक्ता को जारी हुईं दो वोटर आईडी, चुनाव आयोग से जांच और जवाब की मांग

मिथुन अहिरवार का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पहले उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था।

  • Written By:
  • Publish Date - May 30, 2026 / 06:19 PM IST

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मतदाता सूची (Voter List) और वोटर आईडी (Voter ID) को लेकर नया विवाद सामने आया है। कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार को एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग वोटर आईडी जारी होने का मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग (Election Commission-EC) की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision-SIR) पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और चुनाव आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा है।

मिथुन अहिरवार का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पहले उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। बाद में जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई तो सुधार करने के बजाय उनके नाम से दो नई वोटर आईडी जारी कर दी गईं। इससे चुनावी रिकॉर्ड की सटीकता और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार दोनों वोटर आईडी में उनका नाम, पिता का नाम और पता पूरी तरह एक जैसा है। दोनों दस्तावेजों में केवल वोटर आईडी नंबर अलग-अलग हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे थे तो फिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

अहिरवार ने कहा कि आधार कार्ड जैसे यूनिक पहचान दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद यदि किसी व्यक्ति के नाम पर दो वोटर आईडी जारी हो सकती हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है। उन्होंने चुनाव आयोग से पूछा है कि आखिर यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि जारी की गई दोनों वोटर आईडी में वैध कौन सी है। उनका कहना है कि यदि पहले की वोटर आईडी भी रिकॉर्ड में मौजूद है और अब दो नई आईडी भी जारी हो गई हैं, तो इससे मतदान प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता के साथ ऐसा हो सकता है तो आम मतदाताओं की स्थिति क्या होगी। उन्होंने आशंका जताई कि मतदाता सूची में कितने डुप्लीकेट नाम जुड़े होंगे और कितने वास्तविक मतदाता सूची से बाहर हो गए होंगे, इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए।

इस मामले ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी बहस छेड़ दी है। अहिरवार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और लाखों लोगों की भागीदारी रही, लेकिन इसके बावजूद यदि इस तरह की त्रुटियां सामने आ रही हैं तो प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने, त्रुटियों की जांच कराने और मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध एवं पारदर्शी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची की सटीकता लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।