सिवनी के जम्बो सीताफल को GI टैग, 1 किलो तक वजन वाले फल से 3 हजार आदिवासी परिवारों और किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना मजबूत होगी।

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  • Publish Date - June 23, 2026 / 08:49 PM IST

सिवनी (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के प्रसिद्ध जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) टैग मिलने के बाद किसानों और आदिवासी परिवारों में खुशी की लहर है। अपने बड़े आकार, बेहतरीन स्वाद और विशेष गुणवत्ता के लिए पहचान रखने वाले इस जम्बो सीताफल को करीब तीन साल की प्रक्रिया के बाद राष्ट्रीय पहचान मिली है। सिवनी के छपारा क्षेत्र के भूतबंधानी और आसपास के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला यह फल अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में अलग पहचान के साथ पहुंच सकेगा।

जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना मजबूत होगी। साथ ही निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे, जिससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अनुसार चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में दायर आवेदन पर सुनवाई के बाद महानियंत्रक (पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क) तथा रजिस्ट्रार (भौगोलिक संकेतक) कार्यालय ने सिवनी के जम्बो सीताफल को जीआई टैग प्रदान किया है। इसके साथ ही यह मध्य प्रदेश के विशिष्ट कृषि उत्पादों की सूची में शामिल हो गया है।

सिवनी का जम्बो सीताफल अपने असाधारण आकार के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है। सामान्य सीताफल की तुलना में इसका वजन 200 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक होता है। इसकी मिठास, गूदे की गुणवत्ता और स्वाद इसे खास बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र की लाल-भूरी मिट्टी में आयरन की अधिक मात्रा होने के कारण इस सीताफल का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है।

सिवनी के जम्बो सीताफल की मांग पहले से ही दिल्ली, मुंबई, नागपुर और कानपुर जैसे बड़े शहरों में है। जीआई टैग मिलने के बाद इसकी ब्रांडिंग और मजबूत होगी। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और ग्राहकों को असली उत्पाद की पहचान आसानी से हो सकेगी।

यह फल जिले के 3 हजार से अधिक आदिवासी परिवारों और किसानों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में परिवार इसकी खेती और संग्रहण का कार्य करते हैं। जीआई टैग मिलने के बाद उन्हें बेहतर बाजार और अधिक कीमत मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।

सिवनी जिले में करीब 695 हेक्टेयर क्षेत्र में जम्बो सीताफल की खेती की जाती है। यहां हर साल लगभग 6,090 मीट्रिक टन उत्पादन होता है, जिससे 20 से 25 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद यह कारोबार और बढ़ सकता है।

जम्बो सीताफल केवल ताजे फल के रूप में ही नहीं बिकता, बल्कि इसके पल्प से आइसक्रीम, शेक, लस्सी, रबड़ी, बासुंदी और कई प्रकार की मिठाइयां भी तैयार की जाती हैं। इसके अलावा पत्तों और छिलकों का उपयोग जैविक खाद और औषधीय उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है।

किसानों को संगठित करने के लिए जिले में दो किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाए गए हैं। इसके साथ ही तीन सीताफल पल्प प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की गई हैं। इससे किसानों को मूल्य संवर्धन का लाभ मिल रहा है और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद सिवनी के जम्बो सीताफल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान और मजबूत होगी। इससे निर्यात बढ़ने, किसानों को बेहतर दाम मिलने तथा क्षेत्र में रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार की नई संभावनाएं पैदा होंगी।