विश्व सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का बड़ा संदेश, 2047 तक सिकल सेल मुक्त भारत बनाने का आह्वान

By : hashtagu, Last Updated : June 19, 2026 | 11:53 am

ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश): विश्व सिकल सेल दिवस (World Sickle Cell Day) के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने देश को सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia) से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत (Developed India) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है और सिकल सेल जैसी गंभीर आनुवंशिक (Genetic) बीमारी को जड़ से खत्म करना राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मू मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित विश्व सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री मोहन यादव और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047 (National Sickle Cell Eradication Mission-2047) के तहत किया गया।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया का सबसे अधिक प्रभाव आदिवासी (Tribal) और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ता है। इस बीमारी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचने से रोकने के लिए सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग (Screening), जेनेटिक काउंसलिंग (Genetic Counselling) और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों को मिलकर सिकल सेल मुक्त भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए।

मध्य प्रदेश सरकार ने इस अवसर पर सिकल सेल जागरूकता से जुड़े कई नए नवाचार शुरू किए। कार्यक्रम में जेनेटिक काउंसलिंग जागरूकता वीडियो, प्रभावित गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश और प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किए गए। साथ ही 100 प्रतिशत स्क्रीनिंग पूरा करने वाली पंचायतों को सम्मानित किया गया।

राज्य सरकार के अनुसार राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत अब तक मध्य प्रदेश में 1.05 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान दो लाख से ज्यादा कैरियर (Carrier) और 28 हजार से अधिक सिकल सेल रोगियों की पहचान हुई है। इसके अलावा 75 लाख से ज्यादा सिकल सेल कार्ड भी वितरित किए जा चुके हैं, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी समुदायों के बेहतर भविष्य और स्वस्थ जीवन से जुड़ा राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने सभी राज्यों और सामाजिक संगठनों से इस मिशन को जनआंदोलन बनाने की अपील की।