माघ मेले से अविमुक्तेश्वरानंद पर बैन की तैयारी, प्रशासन का दूसरा नोटिस; जवाब नहीं तो जमीन और सुविधाएं होंगी रद्द

प्रशासन ने साफ किया है कि अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संस्था को आवंटित जमीन और अन्य सुविधाएं तत्काल रद्द कर दी जाएंगी।

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 11:49 AM IST

प्रयागराज। माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य (Shankracharya) अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव (conflict) लगातार गहराता जा रहा है। प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस (notice) भेजते हुए चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले से बैन (ban) किया जा सकता है और उनकी संस्था को दी गई जमीन व सुविधाएं भी वापस ली जा सकती हैं। यह नोटिस मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने, बिना अनुमति भीड़ में पालकी (palanquin) लेकर घुसने और मेले की व्यवस्था (system) बिगाड़ने के आरोपों को लेकर जारी किया गया है।

माघ मेला प्रशासन ने नोटिस में सवाल किया है कि मौनी अमावस्या के दिन इमरजेंसी के लिए रिजर्व रखे गए पांटून पुल (pontoon bridge) पर लगे बैरियर को क्यों तोड़ा गया और बिना अनुमति बग्घी के साथ संगम जाने की कोशिश क्यों की गई। प्रशासन का कहना है कि इस कृत्य से भगदड़ (stampede) का खतरा पैदा हुआ, सुरक्षा व्यवस्था (security arrangement) पर गंभीर असर पड़ा और श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने में भारी दिक्कत हुई, जिससे पूरी व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई।

दूसरे सवाल में प्रशासन ने कहा है कि अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड लगाए हैं, जबकि आधिकारिक रूप से उनके शंकराचार्य होने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की रोक लगी हुई है। प्रशासन ने साफ किया है कि अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संस्था को आवंटित जमीन और अन्य सुविधाएं तत्काल रद्द कर दी जाएंगी।

अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी राज ने प्रशासन पर बदले की भावना (retaliation) से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि नोटिस को पंडाल के पीछे गुपचुप तरीके से चस्पा किया गया। बुधवार देर रात प्रशासन का एक कर्मचारी शिविर में आया और कहा कि नोटिस का जवाब नहीं दिया गया है, तब जाकर उन्हें इसकी जानकारी हुई। नोटिस पर 18 जनवरी की तारीख दर्ज थी, जिससे यह आरोप लगाया गया कि इसे बैक डेट (back date) में जारी किया गया। उन्होंने कहा कि नोटिस का जवाब तैयार है और जल्द ही प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।

इससे पहले सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार मेला प्रशासन का पहला नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे थे, लेकिन शिष्यों ने रात में नोटिस लेने से मना कर दिया था। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 8 बजे कानूनगो दोबारा पहुंचे और शिविर के गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया गया। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित किया। इसके जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने मंगलवार रात करीब 10 बजे मेला प्रशासन को 8 पन्नों का जवाब भेजा था और चेतावनी दी थी कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो वह मानहानि (defamation) का मुकदमा करेंगे।

गौरतलब है कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकते हुए पैदल जाने को कहा, जिस पर विरोध हुआ और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की (scuffle) की स्थिति बन गई। इससे नाराज होकर अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने (protest) पर बैठ गए थे। इसी घटनाक्रम के बाद माघ मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद और तेज हो गया है।