Cockroach Janata Party का X अकाउंट भारत में बंद, संस्थापक ने बनाया नया हैंडल

अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें पहले से इसकी आशंका थी क्योंकि एक दिन पहले अकाउंट को हैक करने की कोशिश भी हुई थी।

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 06:28 PM IST

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई व्यंग्यात्मक (Satirical) डिजिटल (Digital) पहल Cockroach Janata Party का X अकाउंट गुरुवार को भारत में बंद कर दिया गया। अकाउंट बंद होने के कुछ ही देर बाद संस्थापक अभिजीत दिपके ने नया हैंडल “Cockroach Is Back” शुरू कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर सेंसरशिप, व्यंग्य और डिजिटल विरोध को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें पहले से इसकी आशंका थी क्योंकि एक दिन पहले अकाउंट को हैक करने की कोशिश भी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस बढ़ते डिजिटल मूवमेंट से घबरा गई है। दिपके ने कहा कि उनकी टीम इस मामले को कानूनी तौर पर चुनौती देगी।

नया X हैंडल शुरू होने के करीब एक घंटे के भीतर ही “Cockroach Is Back” अकाउंट पर हजारों फॉलोअर्स जुड़ गए। दिपके के मुताबिक पुराने अकाउंट पर करीब 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे, जबकि इंस्टाग्राम पेज पर करोड़ों की संख्या में लोग जुड़े हुए हैं।

Cockroach Janata Party की शुरुआत उस विवाद के बाद हुई थी जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर सोशल Media पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ। बाद में CJI ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और उनका निशाना फर्जी डिग्री लेकर पेशे में आने वाले लोग थे।

इसके बावजूद “Cockroach Janata Party” नाम से बना यह ऑनलाइन अभियान तेजी से वायरल हो गया। इस प्लेटफॉर्म ने बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को मीम्स, ग्राफिक्स और व्यंग्य के जरिए उठाया। बड़ी संख्या में युवाओं, एक्टिविस्टों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी इस अभियान को समर्थन दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के संस्थापक अभिजीत दिपके पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने यह दावा भी किया कि इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक करने की कोशिशें की जा रही हैं।

हालांकि X पर मूल अकाउंट भारत में बंद हो गया है, लेकिन “Cockroach” नाम से जुड़े कई दूसरे अकाउंट अब भी सक्रिय हैं। इस पूरे विवाद ने भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन व्यंग्य और डिजिटल अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।