भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई मजबूती, परमाणु ऊर्जा से समुद्री सुरक्षा तक कई अहम समझौतों पर मुहर

दोनों देशों के बीच हुए नागरिक परमाणु ऊर्जा समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की व्यावसायिक आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है।

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 03:12 PM IST

मेलबर्न: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों (Agreements) पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने नागरिक परमाणु ऊर्जा (Civil Nuclear Energy), समुद्री सुरक्षा (Maritime Security), महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

दोनों देशों के बीच हुए नागरिक परमाणु ऊर्जा समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की व्यावसायिक आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है। इससे भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजना को मजबूती मिलेगी। भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।

बैठक में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीति को लेकर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्गों और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सहयोग और मजबूत करने का फैसला किया। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और उभरती तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया “स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार” के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को भविष्य की जरूरत बताया।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने भी भारत के साथ संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों नेताओं ने माना कि यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।