जकार्ता: भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा (Defence), सामरिक साझेदारी (Strategic Partnership), समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) के क्षेत्र में अपने रिश्तों को नई मजबूती दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच मंगलवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के बीच करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें भारत द्वारा इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति, एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइल उपलब्ध कराने, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और रणनीतिक रूप से अहम सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास जैसे फैसले शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे हैं। जकार्ता के राष्ट्रपति भवन इस्ताना मर्देका में उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा, दवाइयों, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
रक्षा सहयोग के तहत इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने का फैसला किया है। इसके अलावा उसने भारत में विकसित एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइल भी आयात करने का निर्णय लिया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस्ट्रा मिसाइल के प्रदर्शन के बाद इंडोनेशिया ने इसमें रुचि दिखाई। ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात के बाद इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद भारत का एक और महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार बन गया है। हालांकि, कितनी मिसाइलों की आपूर्ति की जाएगी, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति बनाई है। भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण में निवेश करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तकनीकी युग में आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण है और इस दिशा में दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।
बैठक में हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और व्यापार को मजबूत करने के उद्देश्य से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनी। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है और क्षेत्रीय समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
इसके अलावा दोनों देशों ने डिजिटल भुगतान प्रणाली में सहयोग, यूपीआई के विस्तार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, इस्पात उद्योग और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम करने का संकल्प भी दोहराया।