कर्नाटक विधानसभा से राज्यपाल थावरचंद गहलोत का वॉकआउट, सरकार का भाषण पढ़ने से इनकार; कांग्रेस सरकार और राजभवन में टकराव

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सत्र की शुरुआत में केवल दो पंक्तियां पढ़ीं और इसके बाद भाषण रोक दिया। उन्होंने सरकार के अभिभाषण में शामिल 11 पैराग्राफ पर आपत्ति जताई थी।

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 12:10 PM IST

बेंगलुरु, कर्नाटक। कर्नाटक में राज्यपाल (Governor) थावरचंद गहलोत और कांग्रेस सरकार के बीच टकराव (conflict) खुलकर सामने आ गया है। बजट सत्र की शुरुआत पर विधानसभा (Assembly) के संयुक्त सत्र में राज्यपाल ने सरकार का तैयार किया गया अभिभाषण (speech) पढ़ने से इनकार कर दिया और सदन से वॉकआउट (walk out) कर गए। इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति (politics) में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सत्र की शुरुआत में केवल दो पंक्तियां पढ़ीं और इसके बाद भाषण रोक दिया। उन्होंने सरकार के अभिभाषण में शामिल 11 पैराग्राफ पर आपत्ति जताई थी। इन पैराग्राफ में केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा (MGNREGA) को कमजोर करने और उसकी जगह VB-G RAM G (Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin) जैसे प्रावधानों का जिक्र किया गया था। राज्यपाल का कहना था कि ऐसे राजनीतिक आरोपों को अभिभाषण में शामिल नहीं किया जा सकता।

राज्य सरकार का आरोप है कि राज्यपाल ने संवैधानिक परंपरा (constitutional convention) का उल्लंघन किया है। सरकार के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत राज्यपाल को मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) द्वारा तैयार किया गया भाषण पढ़ना होता है, न कि उसमें मनमाने बदलाव करना या उसे पढ़ने से इनकार करना।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस सरकार ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था (democratic system) के खिलाफ बताया है। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि राज्यपाल इसी तरह का रवैया अपनाते रहे तो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक ले जाया जा सकता है। मंत्रियों का कहना है कि यह चुनी हुई सरकार के अधिकारों (rights) में हस्तक्षेप है।

वहीं, विपक्षी दल भाजपा (BJP) ने राज्यपाल के कदम का समर्थन किया है। भाजपा का कहना है कि अभिभाषण में केंद्र सरकार के खिलाफ आरोप लगाना उचित नहीं है और राज्यपाल ने संवैधानिक जिम्मेदारी (constitutional responsibility) निभाई है।

गौरतलब है कि इससे पहले केरल और तमिलनाडु में भी राज्यपालों और राज्य सरकारों के बीच इसी तरह के विवाद सामने आ चुके हैं। अब कर्नाटक में यह टकराव और तेज हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र के दौरान तीखी राजनीतिक बहस (heated debate) तय मानी जा रही है।