तेल अवीव, इज़राइल: इज़राइल के राजदूत Reuven Azar ने स्पष्ट कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को उनके इज़राइल दौरे के दौरान या उससे पहले ईरान पर हुए संयुक्त इज़राइल-अमेरिका हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई ऑपरेशनल अवसर (operational opportunity) मिलने के बाद की गई और उस समय तक प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल से वापस जा चुके थे।
राजदूत ने बताया कि हमले का निर्णय पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और सुरक्षा आकलन के आधार पर लिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को पहले से जानकारी देने का सवाल ही नहीं था क्योंकि हमले की समय-सीमा पहले से निर्धारित नहीं थी।
उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल ने वर्षों से ईरान की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपनी खुफिया और सुरक्षा क्षमताओं में भारी निवेश किया है। क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए इज़राइल ने Abraham Accords के तहत कई देशों के साथ समझौते किए हैं और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के साथ सैन्य समन्वय बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री मोदी 25 और 26 फरवरी को इज़राइल के दौरे पर थे। इस दौरान उनकी मुलाकात इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से हुई थी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई और कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दौरे के कुछ ही दिन बाद ईरान पर हमला किया गया, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया।
राजदूत ने कहा कि दौरे के दौरान क्षेत्रीय हालात पर सामान्य चर्चा हुई थी, लेकिन हमले की कोई विशेष योजना साझा नहीं की गई थी। उन्होंने दोहराया कि यह कार्रवाई पूरी तरह परिस्थितियों और सुरक्षा जरूरतों के आधार पर की गई।
इस घटनाक्रम के बीच भारत ने भी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया है। सरकार ने पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बढ़ाया है।
