जनता ने नकार दिया, फिर प्रचार के लिए कोर्ट आए: सुप्रीम कोर्ट की प्रशांत किशोर की पार्टी को फटकार

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  • Publish Date - February 6, 2026 / 04:30 PM IST

नई दिल्ली (दिल्ली): सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी जन सुराज (Jan Suraaj) को कड़ी फटकार लगाते हुए उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि जब जनता ने आपको नकार दिया है तो आप न्यायिक मंच (Judicial platform) का इस्तेमाल प्रचार (publicity) के लिए नहीं कर सकते।

जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती देते हुए दावा किया था कि चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार की योजनाओं के कारण निष्पक्ष चुनाव (fair election) नहीं हुआ और पूरे चुनाव को रद्द किया जाना चाहिए। पार्टी की ओर से कहा गया कि आचार संहिता (Model Code of Conduct) के दौरान सरकार की घोषणाओं से मतदाताओं पर असर पड़ा।

मुख्य न्यायाधीश की अगुआई वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि पार्टी को चुनाव में कितने वोट मिले थे और टिप्पणी की कि जब जनता ने समर्थन नहीं दिया तो सीधे सुप्रीम कोर्ट आकर इस तरह की याचिका दायर करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे राज्य के चुनाव को रद्द करने जैसी मांगें गंभीर होती हैं और इन्हें राजनीतिक लोकप्रियता (popularity) बढ़ाने के औजार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए जन सुराज पार्टी को उचित कानूनी मंच अपनाने की सलाह दी।

इस फैसले को बिहार की राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि अदालत की टिप्पणी ने चुनावी नतीजों को चुनौती देने वाली राजनीतिक पार्टियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका को प्रचार का जरिया नहीं बनाया जा सकता।