कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले (Kanker district) में धर्मांतरण को लेकर विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला कांकेर जिले के ग्राम व्यासकोंगेरा का है, जहां एक मतांतरित परिवार के बुजुर्ग शिवप्रसाद यादव की मौत के बाद शव दफनाने को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बन गई। गांव के लोगों ने धर्म बदले हुए परिवार को गांव के भीतर शव दफनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
जानकारी के अनुसार, जैसे ही शिवप्रसाद यादव की मौत की खबर गांव में फैली, ग्रामीण मतांतरित परिवार के घर के बाहर एकत्र हो गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि यदि परिवार अपने मूल धर्म में वापस लौट आता है, तभी गांव में अंतिम संस्कार की अनुमति दी जाएगी। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो शव को गांव से बाहर ले जाकर ही दफनाना होगा।
मतांतरित परिवार ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया, जिसके चलते सुबह से ही गांव में तनाव बना रहा। हालात बिगड़ते देख पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। शाम तक चले प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद आखिरकार परिवार को मजबूरी में शव को गांव से बाहर ले जाकर कफन-दफन करना पड़ा।
गौरतलब है कि कांकेर जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मतांतरित लोगों की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद होते रहे हैं। पिछले महीने ऐसा ही एक मामला हिंसक रूप ले चुका है। जिले के ग्रामीण इलाकों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इन्हें रोकने के लिए अब तक कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहा है।
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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण को लेकर विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला कांकेर जिले के ग्राम व्यासकोंगेरा का है, जहां एक मतांतरित परिवार के बुजुर्ग शिवप्रसाद यादव की मौत के बाद शव दफनाने को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बन गई। गांव के लोगों ने धर्म बदले हुए परिवार को गांव के भीतर शव दफनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
जानकारी के अनुसार, जैसे ही शिवप्रसाद यादव की मौत की खबर गांव में फैली, ग्रामीण मतांतरित परिवार के घर के बाहर एकत्र हो गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि यदि परिवार अपने मूल धर्म में वापस लौट आता है, तभी गांव में अंतिम संस्कार की अनुमति दी जाएगी। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो शव को गांव से बाहर ले जाकर ही दफनाना होगा।
मतांतरित परिवार ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया, जिसके चलते सुबह से ही गांव में तनाव बना रहा। हालात बिगड़ते देख पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। शाम तक चले प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद आखिरकार परिवार को मजबूरी में शव को गांव से बाहर ले जाकर कफन-दफन करना पड़ा।
गौरतलब है कि कांकेर जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मतांतरित लोगों की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद होते रहे हैं। पिछले महीने ऐसा ही एक मामला हिंसक रूप ले चुका है। जिले के ग्रामीण इलाकों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इन्हें रोकने के लिए अब तक कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहा है।
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