छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर सियासी संग्राम तेज: दीपक बैज की बीजेपी को खुली चुनौती, सीएम और पूर्व सीएम के भुगतान का ब्योरा भी करें सार्वजनिक

दीपक बैज ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस नेताओं के नाम सार्वजनिक किए हैं, लेकिन क्या भाजपा में किसान नहीं हैं? क्या भाजपा नेताओं ने धान नहीं बेचा?

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  • Publish Date - March 2, 2026 / 04:28 PM IST

रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रदेश में धान खरीदी (Paddy Procurement) को लेकर राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा सोशल मीडिया (Social Media) पर जारी एक पोस्टर (Poster) में कांग्रेस नेताओं और उनके परिजनों को धान बिक्री पर मिले भुगतान (Payment) का विवरण साझा किया गया। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे भाजपा की स्तरहीन राजनीति करार दिया और पलटवार किया।

दीपक बैज ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस नेताओं के नाम सार्वजनिक किए हैं, लेकिन क्या भाजपा में किसान नहीं हैं? क्या भाजपा नेताओं ने धान नहीं बेचा? उन्होंने कहा कि यदि भाजपा में साहस है तो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, किरण देव, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक समेत अन्य भाजपा नेताओं को धान बिक्री पर कितना भुगतान हुआ, यह भी सार्वजनिक किया जाए।

बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 7 लाख किसानों का धान नहीं खरीदा और लाखों किसानों से रकबा सरेंडर करवाया। उन्होंने कहा कि अंतर राशि में करीब 2600 करोड़ रुपए कम दिए गए हैं और अब बयानबाजी कर असली मुद्दे से ध्यान भटकाया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने किसानों के खातों में आधी-अधूरी अंतर राशि डाली है। यह राशि समर्थन मूल्य और 3100 रुपए घोषित दर के बीच की है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में समर्थन मूल्य में 117 और 89 रुपए, यानी कुल 206 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में अंतर राशि की गणना 3286 रुपए के आधार पर होनी चाहिए।

बैज के अनुसार सरकार 3100 रुपए के हिसाब से भुगतान कर किसानों के साथ अन्याय कर रही है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी के हिसाब से 21×186 = 3906 रुपए प्रति एकड़ किसानों को कम मिल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष 141 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है और इस आधार पर लगभग 2622 करोड़ रुपए किसानों को कम दिए गए हैं।

दीपक बैज ने कहा कि यह भाजपा की स्तरहीन राजनीति है। यदि हम और हमारे नेता किसान हैं तो स्वाभाविक है कि हमारी उपज का मूल्य हमें मिलेगा। भाजपा ने कोई खैरात नहीं दी है, यह हमारे खून-पसीने की कमाई है। धान खरीदी और अंतर राशि को लेकर प्रदेश में सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।